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डीपीआईआईटी अक्टूबर में विशेष अभियान 6.0 के माध्यम से स्वच्छता और रिकॉर्ड प्रबंधन को देगा बढ़ावा

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत डीपीआईआईटी 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक विशेष अभियान 6.0 आयोजित करेगा। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत बनाना, लंबित मामलों का निपटान करना, ई-वेस्ट का जिम्मेदारी से प्रबंधन करना और कार्यालय के स्थान का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। यह पहल पिछले अभियानों की सफलता पर आधारित है, जिसमें रिकॉर्ड प्रबंधन और कार्यक्षमता में सुधार पर विशेष जोर दिया गया है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने आगामी 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक 'विशेष अभियान 6.0' चलाने की घोषणा की है। इस राष्ट्रव्यापी पहल का मुख्य उद्देश्य विभाग और उसके सभी 19 संबद्ध, अधीनस्थ तथा स्वायत्त संगठनों में स्वच्छता को एक स्थायी संस्कृति के रूप में स्थापित करना है। अभियान के माध्यम से लंबित प्रशासनिक मामलों को कम करने, रिकॉर्ड प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने और कार्यालय परिसरों में उपलब्ध स्थान का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

अभियान की रूपरेखा दो चरणों में तैयार की गई है। 15 से 30 सितंबर 2026 तक चलने वाले तैयारी चरण के दौरान, विभाग अपने लक्ष्यों की पहचान करेगा, लंबित मामलों की समीक्षा करेगा और स्वच्छता कार्यों के लिए आवश्यक तैयारियों को अंतिम रूप देगा। इसके बाद, अक्टूबर के पूरे महीने में मुख्य अभियान संचालित किया जाएगा, जिसमें कार्यालयों की सफाई और अनुपयोगी वस्तुओं के निपटान पर जोर दिया जाएगा।

डीपीआईआईटी ने पिछले 'विशेष अभियान 5.0' के दौरान उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए थे। उस समय 1,572 भौतिक फाइलों की समीक्षा के बाद 1,119 फाइलों को नियमों के अनुसार हटा दिया गया था, जिससे कार्यालय में 11,235 वर्ग फुट स्थान खाली हुआ और 17 लाख रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। इन अनुभवों से प्रेरित होकर, इस बार टिकाऊ सफाई और पर्यावरण के अनुकूल तरीकों को अपनाने पर अधिक बल दिया जा रहा है।

विशेष अभियान 6.0 में इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-वेस्ट) के प्रबंधन को प्राथमिकता दी गई है। विभाग प्राधिकृत एजेंसियों के माध्यम से ई-वेस्ट को एकत्र करने, अलग करने और उसका वैज्ञानिक तरीके से निपटान करने की प्रक्रिया को सुगम बनाएगा। इससे न केवल कार्यस्थल साफ-सुथरे बनेंगे, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल निपटान को भी बढ़ावा मिलेगा।

विभाग अपने संगठनों को नवाचार के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है। भारतीय रबर सामग्री अनुसंधान संस्थान (आईआरएमआरआई) की 'वेस्ट टू वेल्थ' पहल इसका एक उदाहरण है, जिसमें बेकार रबर का उपयोग सड़क निर्माण में किया गया। इस तरह के अनुकरणीय समाधानों को पूरे अभियान के दौरान अन्य कार्यालयों में भी लागू करने का प्रयास किया जाएगा।

अंततः, इस अभियान का लक्ष्य केवल अस्थायी सफाई नहीं, बल्कि एक ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करना है जो जवाबदेही, सुशासन और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को प्राथमिकता दे। विभाग का मानना है कि इन प्रयासों से सरकारी कार्यस्थलों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और प्राप्त परिणाम अभियान की अवधि समाप्त होने के बाद भी लंबे समय तक प्रभावी बने रहेंगे।

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01Press Information Bureauमूल रिपोर्ट देखें ↗