डॉक्यूमेंट्री 'मैं निदा' को नेशनल अवॉर्ड मिलने पर निर्देशक अतुल पांडे ने साझा किए अनुभव
शायर और गीतकार निदा फाजली पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'मैं निदा' को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद निर्देशक अतुल पांडे ने एनडीटीवी से खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि अपने करियर के दौरान निदा फाजली को बॉलीवुड में कई बार ब्लैकलिस्ट किया गया था। पांडे ने इस डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से उनके संघर्षों और साहित्यिक योगदान को उजागर करने का प्रयास किया है।
VIMARSHNAARAD TVहाल ही में घोषित राष्ट्रीय पुरस्कारों में डॉक्यूमेंट्री 'मैं निदा' को सम्मान मिलने से फिल्म जगत में खुशी का माहौल है। इस डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक अतुल पांडे ने एनडीटीवी के साथ एक विशेष साक्षात्कार में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने निदा फाजली के जीवन और उनके करियर की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।
अतुल पांडे ने बताया कि निदा फाजली जैसे महान शायर और गीतकार को भी अपने करियर के दौरान काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने खुलासा किया कि बॉलीवुड में निदा फाजली को कई बार ब्लैकलिस्ट किया गया था। इन चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपनी कलम और शायरी के माध्यम से अपनी एक अलग पहचान बनाई।
डॉक्यूमेंट्री 'मैं निदा' के बारे में बात करते हुए निर्देशक ने कहा कि यह फिल्म निदा फाजली के व्यक्तित्व के उन पहलुओं को सामने लाती है जो आम जनता से छिपे हुए थे। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर काम करना उनके लिए एक भावनात्मक यात्रा रही है।
पांडे ने कहा कि निदा फाजली की शायरी में जो गहराई और सादगी थी, वह आज भी लोगों के दिलों को छूती है। डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की है कि कैसे एक कलाकार ने तमाम बाधाओं के बावजूद अपनी रचनात्मकता को जीवित रखा।
राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना न केवल डॉक्यूमेंट्री की टीम के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह निदा फाजली की विरासत को भी एक नई पहचान देता है। अतुल पांडे ने इस सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह फिल्म निदा फाजली के प्रति एक छोटी सी श्रद्धांजलि है।
साक्षात्कार के दौरान निर्देशक ने निदा फाजली के साथ अपने जुड़ाव और उनके काम से जुड़ी यादों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे निदा फाजली के शब्दों ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया है।
अंत में, अतुल पांडे ने उम्मीद जताई कि यह डॉक्यूमेंट्री आने वाली पीढ़ियों को निदा फाजली के साहित्य और उनके संघर्षों को समझने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि निदा फाजली का काम हमेशा प्रासंगिक रहेगा और उनकी शायरी आने वाले समय में भी लोगों का मार्गदर्शन करती रहेगी।