डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने के प्रस्ताव को किया खारिज
ईरान के विदेश मंत्री अराग़ची ने होर्मुज़ स्ट्रेट को खोलने के लिए एक विशेष योजना पेश की थी। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका को कुछ शर्तों को स्वीकार कर उन पर अमल करना था, जिसके बाद सात दिनों के भीतर जलमार्ग को खोल दिया जाता। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने इस ईरानी पेशकश को सिरे से ठुकरा दिया है।
VIMARSHNAARAD TVईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्री अराग़ची ने होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए एक कूटनीतिक प्रस्ताव रखा था। इस योजना के अनुसार, यदि अमेरिका इस प्रस्ताव की शर्तों को मान लेता और उन्हें लागू करता, तो ईरान सात दिनों के भीतर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोल देता।
बीबीसी न्यूज़ हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में जारी गतिरोध को कम करना था। अराग़ची ने स्पष्ट किया था कि यह कदम दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक प्रयास हो सकता है। ईरान का मानना था कि शर्तों के पालन से स्थिति सामान्य हो सकती है।
हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। ट्रंप ने इस पेशकश को ठुकराते हुए अपनी असहमति जताई है। इस घटनाक्रम के बाद अब क्षेत्र में आगे की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
होर्मुज़ स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इस जलमार्ग के बंद होने या इसमें किसी भी प्रकार की बाधा आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार पर गहरा असर पड़ता है। यही कारण है कि दुनिया भर की निगाहें इस क्षेत्र में होने वाली हर हलचल पर टिकी रहती हैं।
ईरान का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया था जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय क्षेत्र में शांति की उम्मीद कर रहा था। अराग़ची की ओर से पेश की गई शर्तों का विवरण अभी सार्वजनिक रूप से पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन ट्रंप का रुख इस मामले में काफी सख्त रहा है।
फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति बनती नहीं दिख रही है। ट्रंप के इस फैसले के बाद ईरान की अगली प्रतिक्रिया क्या होगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का मानना है कि इस तरह के प्रस्तावों का खारिज होना क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकता है।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटनाक्रम ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे लंबे समय के विवाद का एक हिस्सा है। भविष्य में इस जलमार्ग को लेकर कोई नया समझौता होगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।