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तराई क्षेत्र के किसानों में जमीन से बेदखली का डर, पीढ़ियों से खेती कर रहे सिखों ने जताया विरोध

उत्तराखंड सीमा से लेकर लखीमपुर खीरी तक फैले तराई क्षेत्र के किसानों में अपनी कृषि भूमि खोने का भय व्याप्त है। पीढ़ियों से यहां खेती कर रहे सिख किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीनें छीनी जा रही हैं। इन किसानों का कहना है कि उन्होंने देश के बंटवारे और 1984 के दंगों जैसे कठिन दौर देखे हैं, लेकिन अब वे भूमिहीन होने के डर से चिंतित हैं।

उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में इन दिनों भारी बेचैनी का माहौल है। उत्तराखंड बॉर्डर से लेकर लखीमपुर खीरी तक के विशाल कृषि क्षेत्र में रहने वाले किसान अपनी जमीन को लेकर डरे हुए हैं। विनीत सक्सेना की रिपोर्ट के अनुसार, यहां के किसान, विशेषकर सिख समुदाय के लोग, अपनी पुश्तैनी जमीन से बेदखल किए जाने के डर का सामना कर रहे हैं।

इन किसानों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इस भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। उन्होंने इस क्षेत्र को अपनी मेहनत से उपजाऊ बनाया है। अब उन्हें यह डर सता रहा है कि उनकी मेहनत से तैयार की गई जमीन उनसे छीन ली जाएगी।

किसानों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कई कठिन दौर देखे हैं। देश के बंटवारे की त्रासदी हो, 1984 के दंगे हों या आतंकवाद का दौर, उन्होंने हर परिस्थिति का सामना किया है। लेकिन आज वे जिस स्थिति का सामना कर रहे हैं, वह उन्हें भूमिहीन होने के कगार पर खड़ा कर रही है।

स्थानीय किसानों का आरोप है कि उन्हें उनकी कृषि भूमि से बेदखल करने की कोशिशें की जा रही हैं। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र के किसानों में काफी आक्रोश और चिंता है। वे अपनी जमीन को बचाने के लिए सरकार और प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं।

तराई क्षेत्र का यह इलाका कृषि के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां के किसान न केवल अपनी आजीविका के लिए इस जमीन पर निर्भर हैं, बल्कि वे देश की खाद्य सुरक्षा में भी योगदान देते हैं। ऐसे में जमीन छिनने का डर उनके भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है।

किसानों का कहना है कि वे इस जमीन को अपनी पहचान मानते हैं। पीढ़ियों से यहां रहने के कारण उनका इस मिट्टी से गहरा लगाव है। वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

इस मामले को लेकर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। वे अपनी मांगों को लेकर एकजुट हो रहे हैं और अपनी जमीन के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने की बात कह रहे हैं।

यह स्थिति तराई क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। किसान अब उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द निकाला जाएगा ताकि वे शांति से अपनी खेती जारी रख सकें।

स्रोत

मूल संदर्भ

01तराई क्षेत्र से विनीत सक्सेना की रिपोर्टमूल रिपोर्ट देखें ↗