तेरहवीं के बाद भी शोक मनाएं या नहीं? मोक्ष में बाधा लाती हैं ये 3 गलतियां
परिवारजनों और सगे संबंधियों द्वारा तेरहवीं तक मृतक के लिए शोक मनाना तो उचित है. लेकिन वर्षों तक निरंतर मृतक को स्मृतियों में रोना, उसकी तस्वीर के सामने निरंतर दीपक जलाते रहना, उस आत्मा की आगे की यात्रा में बाधा उत्पन्न करने के अलावा कुछ नहीं है.
विमर्श–नारद टीवी डेस्कअपडेट:
VIMARSHNAARAD TVAaj Tak: परिवारजनों और सगे संबंधियों द्वारा तेरहवीं तक मृतक के लिए शोक मनाना तो उचित है. लेकिन वर्षों तक निरंतर मृतक को स्मृतियों में रोना, उसकी तस्वीर के सामने निरंतर दीपक जलाते रहना, उस आत्मा की आगे की यात्रा में बाधा उत्पन्न करने के अलावा कुछ नहीं है.
स्रोत: Aaj Tak। मूल रिपोर्ट नीचे दिए गए लिंक पर पढ़ें।