दिल्ली के सत्य निकेतन में जर्जर इमारत गिरने से छह लोगों की मौत, बेसमेंट में चल रहा था निर्माण कार्य
दिल्ली के सत्य निकेतन में 50 साल पुरानी एक इमारत ढहने से छह लोगों की जान चली गई है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के समय बेसमेंट में पानी भरा हुआ था और वहां निर्माण कार्य जारी था। घटना के वक्त कई छात्र अपने कमरों में मौजूद थे। अब प्रशासन और भवन मालिकों की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि इस त्रासदी के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है।
VIMARSHNAARAD TVदिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां 50 साल पुरानी एक इमारत अचानक ढह गई। इस हादसे में छह लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत काफी पुरानी थी और उसकी स्थिति काफी जर्जर हो चुकी थी, जिसके बावजूद वहां गतिविधियां जारी थीं।
आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस समय यह इमारत गिरी, उसके बेसमेंट में पानी भरा हुआ था। इसके बावजूद वहां निर्माण कार्य चल रहा था, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक था। इस लापरवाही ने कई जिंदगियों को खतरे में डाल दिया।
हादसे के वक्त इमारत के कमरों में कई छात्र मौजूद थे। अचानक हुई इस दुर्घटना ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया। मलबे में दबने के कारण कई लोगों को गंभीर चोटें आईं और अंततः छह लोगों ने अपनी जान गंवा दी।
इस घटना के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि इतनी पुरानी और जर्जर इमारत में निर्माण कार्य की अनुमति किसने दी थी। क्या प्रशासन ने समय रहते इस भवन की जांच की थी? यह लापरवाही अब जांच का विषय बन गई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इमारत की हालत को देखते हुए इसे पहले ही खाली करा लिया जाना चाहिए था। बेसमेंट में पानी जमा होने की जानकारी होने के बावजूद वहां काम जारी रखना एक बड़ी चूक मानी जा रही है।
फिलहाल, इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस हादसे के लिए मुख्य रूप से कौन जिम्मेदार है और क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
यह त्रासदी दिल्ली में पुरानी इमारतों की सुरक्षा और उनके रखरखाव पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। सत्य निकेतन जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी की आवश्यकता महसूस की जा रही है।