दिल्ली में मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात, सुखोई 57 डील की संभावनाओं पर विशेषज्ञ ने दी राय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आज दिल्ली में मुलाकात होने जा रही है। इस बैठक के बीच सुखोई 57 लड़ाकू विमानों की डील को लेकर चर्चाएं तेज हैं। पूर्व मेजर जनरल अश्विनी शिवाच ने इस पर अपनी राय रखते हुए कहा कि राफेल और सुखोई 57 के आने से भारत चीन और पाकिस्तान के खतरों का मजबूती से सामना करने में सक्षम होगा।
VIMARSHNAARAD TVआज दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इस मुलाकात को लेकर रक्षा और कूटनीतिक गलियारों में काफी चर्चा है। विशेष रूप से सुखोई 57 लड़ाकू विमानों की संभावित डील पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरे के दौरान रक्षा सौदों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। पूर्व मेजर जनरल अश्विनी शिवाच से यह सवाल किया गया कि क्या सुखोई 57 के स्क्वाड्रन और 114 राफेल विमानों के बेड़े में शामिल होने के बाद भारत की स्थिति कैसी होगी।
मेजर जनरल शिवाच ने इस पर अपना विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इन आधुनिक लड़ाकू विमानों के आने से भारत की वायु शक्ति में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। इससे भारत चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली दोहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक मजबूत स्थिति में आ जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के साथ रक्षा सहयोग भारत की सुरक्षा रणनीति का एक अहम हिस्सा रहा है। सुखोई 57 जैसे अत्याधुनिक विमानों का भारत के बेड़े में शामिल होना क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, इस डील को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर इस मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के नेता द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।
सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। राफेल और सुखोई 57 का संयोजन भारतीय वायु सेना को दक्षिण एशिया में एक बड़ी ताकत बना सकता है।
आज की बैठक में रक्षा सौदों के अलावा ऊर्जा, व्यापार और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों पर भी बातचीत होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को इस मुलाकात से और मजबूती मिलने की उम्मीद है।