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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव: निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत ने खींचा सबका ध्यान

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी ने तीन पदों पर कब्जा जमाया है, लेकिन वाइस प्रेसीडेंट पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत सबसे ज्यादा चर्चा में है। उन्होंने नंगे पैर चलकर अपना चुनावी सफर तय किया। इस जीत ने कैंपस की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है, जहां एक स्वतंत्र उम्मीदवार ने बड़े संगठनों के बीच अपनी जगह बनाई है।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद कैंपस की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी ने अपना वर्चस्व बनाए रखते हुए तीन महत्वपूर्ण पदों पर जीत हासिल की है। हालांकि, इन परिणामों के बीच वाइस प्रेसीडेंट पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, दीपांशु शौकीन की यह जीत काफी अनूठी मानी जा रही है। उन्होंने अपने चुनावी प्रचार के दौरान नंगे पैर चलकर लोगों से संपर्क साधा और अपना सफर तय किया। एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर बड़े राजनीतिक संगठनों के बीच अपनी पहचान बनाना और जीत दर्ज करना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

छात्र राजनीति के जानकारों का मानना है कि दीपांशु की यह जीत कैंपस में छात्रों की बदलती पसंद को दर्शाती है। जहां एक ओर एबीवीपी ने अपनी संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर एक स्वतंत्र उम्मीदवार का चुना जाना यह बताता है कि छात्र व्यक्तिगत छवि और मेहनत को भी महत्व दे रहे हैं।

दीपांशु शौकीन के इस सफर की चर्चा सोशल मीडिया से लेकर कैंपस के गलियारों तक हो रही है। उनके नंगे पैर चुनाव प्रचार करने के तरीके ने छात्रों के बीच एक भावनात्मक जुड़ाव पैदा किया। यह जीत इस बात का प्रमाण है कि छात्र संघ चुनावों में व्यक्तिगत प्रयास और जमीनी स्तर पर की गई मेहनत का असर होता है।

एबीवीपी ने तीन पदों पर जीत हासिल कर अपनी पकड़ मजबूत की है, लेकिन वाइस प्रेसीडेंट पद पर दीपांशु का कब्जा होना चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि अपने कार्यकाल के दौरान वे छात्रों की उम्मीदों पर किस तरह खरा उतरते हैं।

फिलहाल, दीपांशु शौकीन की जीत ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र राजनीति के समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कैंपस के छात्र अब उनके भविष्य के फैसलों और छात्र हितों के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर नजर बनाए हुए हैं।

स्रोत

मूल संदर्भ

01BBC News हिंदीमूल रिपोर्ट देखें ↗