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दिव्यांगता की शुरुआती पहचान के लिए माताओं को जागरूक करना जरूरी: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बच्चों में दिव्यांगता की समय रहते पहचान के लिए माताओं को शिक्षित करना अनिवार्य है। उन्होंने प्रबुद्ध मातृ शक्ति सम्मेलन में कहा कि गर्भावस्था के दौरान सही देखभाल और जागरूकता से जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

दिव्यांगता की शुरुआती पहचान के लिए माताओं को जागरूक करना जरूरी: डॉ. जितेंद्र सिंह
आधिकारिक स्रोत का चित्र: Press Information Bureau, Government of India · PIB reusable material · Press Information Bureau

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में आयोजित प्रबुद्ध मातृ शक्ति सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों में दिव्यांगता की रोकथाम के लिए माताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर दिया कि माताएं अक्सर अपने बच्चे के स्वास्थ्य और विकास में होने वाले बदलावों को सबसे पहले महसूस करती हैं। यदि उन्हें सही जानकारी और जागरूकता दी जाए, तो दिव्यांगता की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार संभव हो सकता है।

डॉ. सिंह ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, उचित पोषण और चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श लेना बहुत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि किसी समस्या का पता जन्म से पहले या शुरुआती अवस्था में चल जाए, तो बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। यह प्रयास न केवल रोकथाम के लिए है, बल्कि दिव्यांगजनों के पूर्ण सशक्तीकरण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में सहायता प्रणालियों को मजबूत किया गया है। उन्होंने मध्य प्रदेश में स्थापित हाई-टेक खेल प्रशिक्षण केंद्र का उदाहरण दिया, जिसने पेरिस 2024 पैरालंपिक में भारत के शानदार प्रदर्शन में मदद की। इसके अलावा, देशभर में क्रॉस-डिसएबिलिटी अर्ली ट्रीटमेंट सेंटर भी खोले जा रहे हैं।

सरकारी कर्मचारियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर चर्चा करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि दिव्यांग बच्चों वाले अभिभावकों के लिए रोटेशनल ट्रांसफर से छूट, एजुकेशन अलाउंस और दो साल की पेड चाइल्ड केयर लीव जैसे प्रावधान किए गए हैं। ये उपाय परिवारों को एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम प्रदान करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।

सम्मेलन में सक्षम संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि जागरूकता को सामुदायिक स्तर तक ले जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर मां जागरूक हो और कोई भी बच्चा पीछे न छूटे। इस कार्यक्रम में स्थानीय विधायक राजीव जसरोटिया और सक्षम के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

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