नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के बौद्धिक संपदा प्रमुखों की 18वीं बैठक संपन्न, सहयोग पर जोर
नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के बौद्धिक संपदा कार्यालयों के प्रमुखों की 18वीं बैठक आयोजित की गई। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में सदस्य देशों ने नवाचार और आर्थिक विकास के लिए बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया। बैठक में नए परिचालन दिशानिर्देशों को अपनाया गया और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण तथा पेटेंट प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने पर चर्चा की गई।

नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के बौद्धिक संपदा (आईपी) कार्यालयों के प्रमुखों की 18वीं बैठक का आयोजन किया गया। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय कार्यक्रम 1 से 3 सितंबर 2026 तक चला। इसमें लगभग 35 प्रतिनिधियों ने भौतिक और वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान सदस्य देशों ने वैश्विक नवाचार और आर्थिक विकास के लिए बौद्धिक संपदा के महत्व को रेखांकित किया। भारत की अध्यक्षता के विषय 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सततता के लिए निर्माण' के अनुरूप, प्रतिनिधियों ने आईपी ढांचे के माध्यम से तकनीकी और आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की।
सहयोग को और अधिक परिणामोन्मुख बनाने के लिए बैठक में अद्यतन परिचालन दिशानिर्देशों को अपनाया गया। इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य सीमा-पार नवाचार को प्रोत्साहित करना और वैश्विक आईपी मानकों को मजबूती प्रदान करना है। इसके अलावा, पारंपरिक ज्ञान और चिकित्सा प्रणालियों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
पेटेंट परीक्षा प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और लंबित मामलों में कमी लाने की दिशा में हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। पेटेंट एनालिटिक्स और भौगोलिक संकेतकों (जीआई) के व्यावसायीकरण से संबंधित निष्कर्षों को भी स्वीकार किया गया, ताकि ब्रिक्स बाजारों में दक्षता बढ़ाई जा सके।
संस्थागत सहभागिता को गहरा करने के लिए कई नई परियोजनाओं पर चर्चा पूरी की गई। इनमें फिनटेक इनोवेशन मॉनिटर, औद्योगिक संपदा व्यावसायीकरण फोरम, और बौद्धिक संपदा जागरूकता श्रृंखला जैसी पहल शामिल हैं। साथ ही, पेटेंट दस्तावेजीकरण के लिए एक मैनुअल तैयार करने पर भी विचार किया गया।
प्रतिनिधियों ने परियोजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए समन्वय तंत्र और नियमित समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक के सफल आयोजन के लिए भारत के ओ/ओ सीजीपीडीटीएम की सराहना की गई। भारत के लिए इस वार्षिक बैठक की मेजबानी करना वैश्विक बौद्धिक संपदा क्षेत्र में देश के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक माना गया।
