नब्बे के दशक का वह मशहूर गाना, जिसने सैफ अली खान के डांस और उदित नारायण की आवाज से मचाई थी धूम
नब्बे के दशक का एक लोकप्रिय गीत आज भी लोगों की यादों में बसा हुआ है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उदित नारायण द्वारा गाए गए और सैफ अली खान पर फिल्माए गए इस गाने ने उस दौर के कॉलेज छात्रों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की थी। यह धुन न केवल युवाओं की पहली पसंद बनी, बल्कि उस समय की हर पार्टी और समारोह का एक अनिवार्य हिस्सा भी बन गई थी।
VIMARSHNAARAD TVनब्बे के दशक का संगीत आज भी कई लोगों के लिए पुरानी यादों का एक खूबसूरत पिटारा है। उस दौर में नए गानों का क्रेज युवाओं के सिर चढ़कर बोलता था। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसा ही गाना है जो 33 साल पुराना होने के बावजूद आज भी लोगों के दिलों में ताजा है। इस गीत की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस समय यह कॉलेज जाने वाले छात्रों की जुबान पर हर वक्त रहता था।
इस गाने की सफलता के पीछे उदित नारायण की सुरीली आवाज का बड़ा योगदान रहा है। उनकी गायकी ने इस धुन को एक अलग ही पहचान दी, जो सीधे सुनने वालों के दिलों को छू गई। उदित नारायण की आवाज का जादू उस दौर के हर संगीत प्रेमी पर छाया हुआ था।
गाने के दृश्यों में सैफ अली खान का डांस भी दर्शकों को खूब पसंद आया था। उनके अंदाज और ऊर्जा ने इस गाने को और भी यादगार बना दिया। सैफ अली खान के उस समय के डांस स्टेप्स और उनकी अदाकारी ने युवाओं को काफी प्रभावित किया था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि यह गाना उस समय की हर पार्टी और कॉलेज के कार्यक्रमों की शान बन गया था। हर समारोह में इस धुन का बजना लगभग तय होता था। युवाओं के बीच इसकी दीवानगी का आलम यह था कि वे इसे बार-बार सुनना पसंद करते थे।
आज भी जब यह गाना कहीं बजता है, तो नब्बे के दशक की यादें ताजा हो जाती हैं। यह गीत उस दौर की संस्कृति और युवाओं की पसंद का एक बेहतरीन उदाहरण माना जाता है। संगीत प्रेमियों के लिए यह धुन आज भी एक खास स्थान रखती है।
एनडीटीवी इंडिया की जानकारी के अनुसार, इस गाने ने उस समय के संगीत जगत में अपनी एक अलग जगह बनाई थी। उदित नारायण और सैफ अली खान की जुगलबंदी ने इसे सदाबहार बना दिया। आज भी लोग इस पुराने गाने को उतनी ही शिद्दत से याद करते हैं।