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नमस्ते-एसयूवाई योजना ने बदली गाजियाबाद के चेतन कुमार की जिंदगी, सफाई कार्य से बने आत्मनिर्भर उद्यमी

गाजियाबाद के चेतन कुमार कौशिक ने नमस्ते-एसयूवाई योजना की मदद से वित्तीय कठिनाइयों से उबरकर एक सफल सफाई सेवा उद्यम स्थापित किया है। 32 वर्षीय चेतन, जो पहले आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों से जूझ रहे थे, अब अपनी सक्शन-मशीन के जरिए प्रतिमाह 40,000 से 50,000 रुपये कमा रहे हैं। सरकार द्वारा प्रदान की गई ऋण और सब्सिडी सहायता ने उन्हें न केवल आर्थिक स्थिरता दी, बल्कि समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का आत्मविश्वास भी प्रदान किया है।

नमस्ते-एसयूवाई योजना ने बदली गाजियाबाद के चेतन कुमार की जिंदगी, सफाई कार्य से बने आत्मनिर्भर उद्यमी
आधिकारिक स्रोत का चित्र: Press Information Bureau, Government of India · PIB reusable material · Press Information Bureau

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद निवासी 32 वर्षीय चेतन कुमार कौशिक ने अपनी मेहनत और सरकारी सहायता के दम पर आत्मनिर्भरता की एक नई मिसाल पेश की है। 12वीं कक्षा तक शिक्षित चेतन लंबे समय से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई का काम कर रहे थे। हालांकि, सीमित आय के कारण वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे और परिवार की जिम्मेदारियां उठाना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था।

चेतन के जीवन में सबसे कठिन दौर तब आया जब उनकी मां गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं। परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य के रूप में, उन्होंने अपनी बचत का अधिकांश हिस्सा मां के इलाज में खर्च कर दिया। दुर्भाग्यवश, 2022 में उनकी मां का निधन हो गया, जिसने उन्हें भावनात्मक और आर्थिक रूप से तोड़ दिया। इसके बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और अपने काम को जारी रखा।

बदलाव तब आया जब उन्हें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की 'नमस्ते-एसयूवाई' (स्वच्छता उद्यमी योजना) के बारे में पता चला। इस योजना के तहत उन्हें अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता मिली। कुल 8.90 लाख रुपये की परियोजना के लिए उन्हें 5.42 लाख रुपये का ऋण और 3.47 लाख रुपये की पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की गई।

इस सहायता से चेतन ने अपनी सक्शन-मशीन के कामकाज को आधुनिक बनाया और बेहतर सेवाएं देना शुरू किया। आज उनकी मासिक आय 40,000 से 50,000 रुपये के बीच पहुंच गई है। वे नियमित रूप से अपने ऋण की किस्तें चुका रहे हैं और उम्मीद है कि अक्टूबर 2026 तक वे पूरी तरह कर्जमुक्त हो जाएंगे।

चेतन की यह सफलता केवल आर्थिक सुधार तक सीमित नहीं है। इस योजना ने उन्हें समाज में एक उद्यमी के रूप में पहचान और सम्मान दिलाया है। उनका मानना है कि सही समय पर मिली वित्तीय मदद किसी भी व्यक्ति के जीवन की दिशा बदल सकती है।

सरकार की यह पहल सफाई कर्मियों को सुरक्षित और टिकाऊ आजीविका के अवसर प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। चेतन की कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करने का साहस रखते हैं।

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