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नेपाल बाढ़ का दंश: बिहार के परिवारों को अपनों की वापसी या उनके शव मिलने का इंतजार

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार के पूर्वी और पश्चिम चंपारण के कई परिवार गहरे संकट में हैं। इन जिलों से बड़ी संख्या में लोग नेपाल में मजदूरी करने गए थे, जिनका अब कोई पता नहीं है। पीड़ित परिवार चमत्कारिक रूप से उनके जीवित लौटने या कम से कम उनके शव मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं ताकि वे अंतिम संस्कार कर सकें।

नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने बिहार के सीमावर्ती जिलों के कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। पूर्वी और पश्चिम चंपारण जिले के सैकड़ों लोग रोजी-रोटी की तलाश में नेपाल गए थे, लेकिन प्राकृतिक आपदा के बाद से उनका संपर्क अपने घरों से पूरी तरह टूट गया है।

इन परिवारों के लिए यह समय बेहद कठिन है। वे अपने प्रियजनों के बारे में किसी भी जानकारी के लिए तरस रहे हैं। बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, कई लोग अब इस उम्मीद में हैं कि शायद उनके परिजन किसी तरह सुरक्षित बच गए हों और वे वापस लौट आएं।

हालांकि, समय बीतने के साथ उनकी उम्मीदें धुंधली होती जा रही हैं। अब कई परिवारों की एकमात्र इच्छा यह रह गई है कि उन्हें अपने प्रियजनों के शव मिल जाएं। उनका कहना है कि कम से कम उन्हें अंतिम संस्कार करने का मौका मिल जाए, ताकि वे अपने अपनों को अंतिम विदाई दे सकें।

बाढ़ के कारण नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही हुई है, जिससे राहत और बचाव कार्य भी प्रभावित हुए हैं। बिहार के इन परिवारों के लिए प्रशासन से मदद की गुहार लगाना ही एकमात्र रास्ता बचा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मजदूरी करने गए लोगों के बिना उनके घरों में चूल्हा जलना भी मुश्किल हो गया है। आर्थिक तंगी के साथ-साथ अपनों को खोने का डर उन्हें अंदर से तोड़ रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर लापता लोगों की तलाश की जा रही है, लेकिन आपदा की भयावहता के कारण सटीक जानकारी जुटाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। परिवारों का दर्द और उनकी अनिश्चितता लगातार बढ़ती जा रही है।

यह त्रासदी केवल नेपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर बिहार के उन गरीब परिवारों पर पड़ा है जो पूरी तरह से इन मजदूरों की कमाई पर निर्भर थे। अब वे केवल एक सूचना के इंतजार में दिन-रात बिता रहे हैं।

स्रोत

मूल संदर्भ

01BBC News हिंदीमूल रिपोर्ट देखें ↗