नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन का कहर: जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे सैकड़ों कर्मचारी, भारत से मांगी मदद
नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ और भूस्खलन से रसुवा और नुवाकोट जिलों में 13 जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इस आपदा के कारण करीब 933 कर्मचारी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें से 254 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। बचाव कार्यों के लिए नेपाल ने भारत से सहायता का अनुरोध किया है, जिसके बाद भारत ने राहत सामग्री भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।
VIMARSHNAARAD TVनेपाल में प्राकृतिक आपदा ने गंभीर संकट पैदा कर दिया है। भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ और उसके बाद हुए भूस्खलन ने रसुवा और नुवाकोट क्षेत्रों में स्थित जलविद्युत परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया है। इन परियोजनाओं से जुड़े सैकड़ों कर्मचारी सुरंगों में फंस गए हैं, जिससे वहां हड़कंप मच गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा से कुल 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। लापता कर्मचारियों की संख्या 933 तक पहुंच गई है, जो बचाव दलों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि, राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं और अब तक 254 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है।
संकट की इस घड़ी में नेपाल सरकार ने भारत से मदद की गुहार लगाई है। नेपाल की ओर से की गई अपील के बाद भारत ने तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। भारत सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री भेजने का निर्णय लिया है ताकि फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द सहायता पहुंचाई जा सके।
स्थानीय प्रशासन और बचाव दल लगातार मलबे को हटाने और सुरंगों के भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। भूस्खलन के कारण बचाव कार्यों में काफी बाधाएं आ रही हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
यह आपदा नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। जलविद्युत परियोजनाएं नेपाल की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन पर आए इस संकट का असर लंबे समय तक रह सकता है।
भारत और नेपाल के बीच इस सहयोग को दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों के रूप में देखा जा रहा है। राहत सामग्री के साथ-साथ तकनीकी सहायता की भी आवश्यकता हो सकती है, जिस पर दोनों देशों के अधिकारी समन्वय कर रहे हैं।
फिलहाल, लापता लोगों के परिजनों में भारी चिंता है और वे अपने प्रियजनों के सुरक्षित लौटने की प्रार्थना कर रहे हैं। बचाव अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मौसम और भू-भाग की स्थिति कितनी अनुकूल रहती है।