न्यायपालिका में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना जरूरी: उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने न्यायपालिका में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अदालती कामकाज में हिंदी का उपयोग आम जनता के लिए अत्यंत आवश्यक है। पाठक ने इस बात पर बल दिया कि न्याय प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए हिंदी को बढ़ावा देना समय की मांग है।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान न्यायपालिका में राजभाषा हिंदी के बढ़ते उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि अदालती कार्यवाही और फैसलों में हिंदी का प्रयोग आम आदमी के लिए न्याय को अधिक सुलभ और समझने योग्य बनाता है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका में हिंदी का इस्तेमाल बढ़ाना न केवल राजभाषा के प्रति सम्मान है, बल्कि यह आम जनता के हितों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जब न्याय प्रक्रिया अपनी भाषा में होती है, तो वादी और प्रतिवादी दोनों को अपने मामले को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि कानूनी शब्दावली और अदालती कामकाज में हिंदी को प्राथमिकता देने से न्याय प्रणाली में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आम जनता के लिए न्यायपालिका की भाषा सरल होनी चाहिए ताकि वे अपनी कानूनी लड़ाई को खुद समझ सकें।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है कि सरकारी कामकाज और न्यायपालिका में हिंदी का प्रयोग अधिक से अधिक हो। उन्होंने कहा कि यह एक सकारात्मक बदलाव है जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने में सहायक होगा।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने हिंदी भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह हमारी संस्कृति और पहचान का हिस्सा है। न्यायपालिका में इसका प्रयोग बढ़ने से न केवल भाषा का विकास होगा, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों को भी मजबूत करेगा।
अंत में, उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि वे हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में हिंदी का उपयोग बढ़ाना एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जो आम जनता के लिए न्याय को और अधिक सुलभ बनाएगी।
