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पंचकुला में अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस पर कार्यशाला, गिद्धों के संरक्षण के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई गई

हरियाणा के पंचकुला में अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 मनाया गया। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने गिद्ध संरक्षण पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने गिद्धों को पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण के लिए तकनीकी क्षमता और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया। जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र के प्रयासों की भी सराहना की गई।

पंचकुला में अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस पर कार्यशाला, गिद्धों के संरक्षण के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई गई
आधिकारिक स्रोत का चित्र: Press Information Bureau, Government of India · PIB reusable material · Press Information Bureau

हरियाणा के पंचकुला में अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने 'संकट से उबरना - भारत के गिद्धों का संरक्षण' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में हरियाणा के वन मंत्री श्री राव नरबीर सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए।

सभा को संबोधित करते हुए श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का दृष्टिकोण समग्र पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण पर आधारित है। उन्होंने बताया कि भारत में विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। गिद्धों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ये पक्षी प्रकृति के कुशल सफाईकर्मी हैं, जो पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।

मंत्री ने गिद्धों की आबादी में गिरावट के कारणों पर चर्चा की, जिसमें मुख्य रूप से खाद्य श्रृंखला में व्यवधान और पशुओं के इलाज में उपयोग की जाने वाली कुछ दवाएं शामिल हैं। उन्होंने 'संपूर्ण सरकार' और 'संपूर्ण समाज' के समन्वित प्रयासों का आह्वान किया ताकि गिद्धों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सके।

इस अवसर पर पिंजोर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र (जेसीबीसी) के कार्यों की सराहना की गई। यह केंद्र सफेद पूंछ वाले और अन्य प्रजातियों के गिद्धों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र ने 356 गिद्धों को आश्रय दिया और 35 चूजों का सफल प्रजनन कराया।

कार्यक्रम के दौरान 'जटायु की कहानी: भारत के गिद्धों का संरक्षण' नामक एक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया। यह पुस्तक भारत में गिद्धों की घटती संख्या से लेकर उनके सफल प्रजनन तक के सफर को दर्शाती है।

श्री राव नरबीर सिंह ने भी गिद्ध संरक्षण में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी क्षमता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संरक्षण की सफलता केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह स्वस्थ आबादी की स्थापना और पारिस्थितिक योगदान पर आधारित होनी चाहिए।

कार्यशाला में चित्रकला और डिजिटल फोटोग्राफी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। यह आयोजन भारत की गिद्ध संरक्षण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

अंत में, यह स्पष्ट किया गया कि विज्ञान, नीति और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से ही गिद्धों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। भारत अपने विविध गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण के लिए पूरी तरह समर्पित है।

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01Press Information Bureauमूल रिपोर्ट देखें ↗