पर्यावरण और जलवायु गतिकी पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री का संबोधन, भारत की हरित उपलब्धियों पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने पर्यावरण और जलवायु गतिकी पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत की हरित पहलों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत ने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को समय से पहले पूरा किया है। सौर ऊर्जा क्षमता में भारी वृद्धि, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा और जल संरक्षण के प्रयासों के माध्यम से भारत सतत विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
VIMARSHNAARAD TVप्रधानमंत्री ने 'पर्यावरण और जलवायु गतिकी का भविष्य' विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अपनी प्राचीन परंपराओं और आधुनिक दृष्टिकोण के मेल से जलवायु चुनौतियों का समाधान कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भारत का प्रति व्यक्ति योगदान विकसित देशों की तुलना में काफी कम है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत जी-20 का एकमात्र ऐसा देश है जिसने पेरिस COP-21 के अपने सभी वादों को समय सीमा से पहले पूरा किया है। पिछले 12 वर्षों में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 2 गीगावाट से बढ़कर 160 गीगावाट से अधिक हो गई है। 'पीएम सूर्यघर मुक्त बिजली योजना' के तहत 50 लाख से अधिक घरों में रूफ-टॉप सोलर पैनल लगाए गए हैं।
क्लीन मोबिलिटी के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में 950 गुना का इजाफा हुआ है। इसके अलावा, देश में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार और रेलवे का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पर्यावरण संरक्षण में सहायक सिद्ध हुआ है। उन्होंने हाइड्रोजन ट्रेन और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को भी आधुनिक भारत की बड़ी उपलब्धि बताया।
जल संरक्षण के लिए 'अमृत सरोवर' और 'कैच द रेन' जैसे अभियानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने जल प्रबंधन में भी नए मानक स्थापित किए हैं। कृषि क्षेत्र में 'श्री अन्न' (मिलेट्स) को बढ़ावा देने से पानी की खपत कम हुई है और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
प्राकृतिक खेती और वन क्षेत्र में वृद्धि पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का 'वेरी डेंस फॉरेस्ट कवर' पिछले 12 वर्षों में 22 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है। उन्होंने 'वेस्ट टू वेल्थ' मॉडल के तहत कचरा प्रबंधन और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध को भी महत्वपूर्ण कदम बताया। अंत में, उन्होंने कहा कि भारत का विकास न केवल तेज है, बल्कि टिकाऊ भी है, जो मानवता के भविष्य के लिए एक जिम्मेदारी है।