पश्चिम बंगाल में गणेश पूजा पंडाल की 'हिंदू राष्ट्र' थीम पर विवाद, पीएम मोदी की मूर्ति पर उठे सवाल
पश्चिम बंगाल के बेलूर बाजार में गणेश पूजा के दौरान एक पंडाल की थीम को लेकर बहस छिड़ गई है। पंडाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भगवान गणेश को 'चाय पे चर्चा' करते हुए दिखाया गया है, जिसे 'हिंदू राष्ट्र' की थीम से जोड़ा जा रहा है। इस राजनीतिक प्रतीकात्मकता पर विभिन्न पक्षों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
VIMARSHNAARAD TVपश्चिम बंगाल के बेलूर बाजार में आयोजित गणेश पूजा का एक पंडाल इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस पंडाल में भगवान गणेश के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मूर्ति स्थापित की गई है, जिसमें दोनों को 'चाय पे चर्चा' करते हुए दर्शाया गया है। इस सजावट को 'हिंदू राष्ट्र' की थीम के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया है।
पंडाल में की गई इस सजावट को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। आलोचकों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों में इस तरह की राजनीतिक प्रतीकात्मकता का इस्तेमाल अनुचित है। वहीं, आयोजकों का अपना पक्ष है, जो इसे अपनी आस्था और अभिव्यक्ति का हिस्सा बता रहे हैं।
NDTV इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक रंग ले लिया है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस पर अपनी अलग-अलग राय व्यक्त की है। कुछ लोगों का मानना है कि यह धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है, जबकि अन्य इसे एक कलात्मक अभिव्यक्ति के रूप में देख रहे हैं।
पंडाल की थीम में 'हिंदू राष्ट्र' के संदेश को प्रमुखता से दर्शाया गया है, जिसके कारण यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। पश्चिम बंगाल में धार्मिक आयोजनों के दौरान अक्सर राजनीतिक प्रतीकों का उपयोग विवाद का कारण बनता रहा है।
इस घटना ने सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक और राजनीतिक प्रतीकों के मेल को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। प्रशासन और स्थानीय पुलिस भी इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
गणेश पूजा के दौरान पंडालों में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को दर्शाना एक पुरानी परंपरा रही है, लेकिन इस बार की थीम ने विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया है। लोग सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बंटे हुए नजर आ रहे हैं।
फिलहाल, इस विवाद को लेकर कोई आधिकारिक कार्रवाई की सूचना नहीं है, लेकिन इस पर चर्चाओं का दौर जारी है। आयोजकों ने अभी तक इस पर कोई औपचारिक सफाई नहीं दी है, जिससे विवाद के और बढ़ने की संभावना बनी हुई है।