पहलगाम हमले में सेना की कार्रवाई पर शहीद शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या ने जताया आभार
पितृपक्ष के दौरान शहीद शुभम द्विवेदी की धर्मपत्नी ऐशान्या ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सेना द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई के लिए सेना का धन्यवाद किया है। उन्होंने इस कठिन समय में देश की सुरक्षा के लिए तैनात जवानों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है। पितृपक्ष की परंपराओं के बीच यह भावुक संदेश शहीदों के प्रति सम्मान और सेना के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है।
VIMARSHNAARAD TVपितृपक्ष का पावन समय चल रहा है, जो अपने पूर्वजों और दिवंगत प्रियजनों को याद करने और उन्हें तर्पण देने के लिए समर्पित है। इस अवसर पर कानपुर के शहीद शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के संदर्भ में सेना के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है। उन्होंने सेना द्वारा की गई त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की सराहना की है।
ऐशान्या ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद जिस तरह से भारतीय सेना ने मोर्चा संभाला और आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया, वह सराहनीय है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश की सुरक्षा के लिए जान जोखिम में डालने वाले जवानों का साहस ही देश को सुरक्षित रखता है।
शहीद की पत्नी ने इस कठिन दौर में सेना के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए कहा कि वे उन सभी जवानों की आभारी हैं जो सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। उनके अनुसार, पितृपक्ष के दौरान शहीदों को याद करना और उनके बलिदान को नमन करना एक भावनात्मक अनुभव है।
पहलगाम हमले की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। ऐसे समय में जब पूरा देश अपने शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहा है, ऐशान्या का यह बयान सेना के मनोबल को बढ़ाने वाला माना जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी सेना इसी तरह देश की रक्षा में तत्पर रहेगी।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, ऐशान्या ने उन सभी शहीदों को भी नमन किया जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा और देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा।
पितृपक्ष की परंपराओं के अनुसार, दिवंगतों को तर्पण देने की प्रक्रिया में शुभम द्विवेदी की स्मृति को भी संजोया गया है। ऐशान्या का यह संदेश न केवल एक शहीद की पत्नी के रूप में है, बल्कि एक जागरूक नागरिक के रूप में भी है जो सेना के शौर्य का सम्मान करती है।
सेना के प्रति उनका यह आभार सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग उनके साहस और धैर्य की सराहना कर रहे हैं। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि शहीद परिवारों का सेना के प्रति विश्वास आज भी अटूट है।