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पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से कानपुर के कई इलाकों में बाढ़, घरों को छोड़ने को मजबूर लोग

कानपुर में पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से आसपास की बस्तियों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, मर्दनपुरवा, मायापुरम, गुजैनी, ग्राम पिपौरी और मेहरबान सिंह का पुरवा जैसे कई क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। पानी भरने के कारण स्थानीय परिवारों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

कानपुर में पांडु नदी का बढ़ता जलस्तर स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, नदी का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंचने से आसपास के कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। जलभराव के कारण लोगों का सामान्य जीवन पूरी तरह से प्रभावित हुआ है।

बाढ़ का पानी मर्दनपुरवा, मायापुरम और गुजैनी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में घुस गया है। इसके अलावा, ग्राम पिपौरी और मेहरबान सिंह का पुरवा में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। इन इलाकों में रहने वाले परिवारों को अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी का स्तर तेजी से बढ़ने के कारण उन्हें अपनी जरूरी चीजों को समेटने का भी मौका नहीं मिला। कई घरों में पानी भर जाने से सामान खराब हो गया है और लोगों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बस्तियों में जलभराव के कारण आवागमन भी पूरी तरह से बाधित हो गया है।

प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है, लेकिन नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने चिंता बढ़ा दी है। प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग अब ऊंचे स्थानों या अपने रिश्तेदारों के घरों की ओर पलायन कर रहे हैं। बाढ़ के कारण बस्तियों में बिजली और पानी की आपूर्ति भी प्रभावित होने की आशंका है।

पांडु नदी के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह समय बेहद कठिन है। घरों में पानी घुसने से न केवल संपत्ति का नुकसान हुआ है, बल्कि मवेशियों और पालतू जानवरों को भी सुरक्षित निकालने की चुनौती सामने आई है। कई परिवारों ने अपनी चौखट छोड़ दी है और अब वे खुले आसमान के नीचे या अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

स्थानीय प्रशासन और राहत दलों द्वारा स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन पानी का बहाव तेज होने के कारण राहत कार्यों में भी बाधा आ रही है। लोग अब नदी के जलस्तर के कम होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे वापस अपने घरों में लौट सकें।

यह बाढ़ न केवल भौतिक नुकसान का कारण बनी है, बल्कि इसने लोगों के मन में डर भी पैदा कर दिया है। नदी के किनारे बसे इन गांवों और बस्तियों में हर साल मानसून के दौरान ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने स्थिति को और अधिक भयावह बना दिया है।

आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और नदी के जलस्तर पर ही लोगों की वापसी निर्भर करेगी। फिलहाल, प्रभावित परिवारों की प्राथमिकता अपनी जान बचाना और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचना है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी के किनारे न जाने की अपील की है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुरमूल रिपोर्ट देखें ↗