पालघर अस्पताल मारपीट मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर जताई नाराजगी, एसपी को किया तलब
पालघर अस्पताल में हुई मारपीट के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस की सुस्त कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने इस मामले में नौ आरोपियों के अब तक फरार होने पर नाराजगी व्यक्त की है। कोर्ट ने पालघर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
VIMARSHNAARAD TVपालघर के एक अस्पताल में हुई मारपीट की घटना को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन के प्रति सख्त रुख अपनाया है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्य चिंता का विषय यह है कि घटना के काफी समय बीत जाने के बाद भी नौ आरोपी अभी तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त किया। न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर हुई हिंसा को हल्के में नहीं लिया जा सकता। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी में हो रही देरी को लेकर कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई है।
इस मामले में जवाबदेही तय करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने पालघर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को अदालत में तलब किया है। एसपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताना होगा कि अब तक आरोपियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा सका है और जांच में किस प्रकार की बाधाएं आ रही हैं।
अस्पताल में हुई मारपीट के कारण चिकित्सा व्यवस्था और कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगा है। कोर्ट ने पुलिस से इस बात का भी ब्योरा मांगा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह रुख पुलिस को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक सतर्क रहने का संदेश देता है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी अब पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
मामले की अगली सुनवाई में एसपी को कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। अदालत का यह निर्देश पुलिस विभाग के लिए एक कड़ा संदेश है कि कानून व्यवस्था के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
फिलहाल, पालघर पुलिस पर आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ने का भारी दबाव है। इस मामले में आगे की कार्रवाई कोर्ट के अगले आदेशों पर निर्भर करेगी।