पितृ पक्ष 2026: विदेश में रहने वाले लोग कैसे करें श्राद्ध, भारत की तिथि या स्थानीय पंचांग का करें पालन?
पितृ पक्ष के दौरान विदेश में रहने वाले लोग अक्सर असमंजस में रहते हैं कि श्राद्ध भारत की तिथि के अनुसार करें या वहां के स्थानीय पंचांग के अनुसार। एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, श्राद्ध की सही तारीख और अपराह्न काल का महत्व समझना आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही नियमों का पालन करना पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए जरूरी है।
VIMARSHNAARAD TVपितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों को याद करना और उनका श्राद्ध करना भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, जो लोग विदेश में रह रहे हैं, उनके लिए यह अक्सर एक बड़ा सवाल होता है कि वे श्राद्ध की तिथि का निर्धारण कैसे करें। एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, इस विषय पर स्पष्टता होना बहुत जरूरी है ताकि धार्मिक अनुष्ठान सही ढंग से संपन्न हो सकें।
मुख्य प्रश्न यह उठता है कि क्या विदेश में रहने वाले व्यक्ति को भारत की तिथि का पालन करना चाहिए या उस देश के स्थानीय पंचांग का। धार्मिक जानकारों के अनुसार, श्राद्ध के लिए तिथि का चयन करते समय अपराह्न काल का विशेष महत्व होता है। यह समय पितृ कर्म के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि श्राद्ध की सही तारीख तय करने के लिए कुछ विशिष्ट नियमों का पालन करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति विदेश में है, तो उसे अपने स्थान के अनुसार पंचांग की गणना देखनी चाहिए, लेकिन साथ ही भारत की परंपराओं का भी ध्यान रखना चाहिए।
अपराह्न काल का अर्थ है दिन का वह समय जो दोपहर के बाद आता है। पितृ पक्ष में श्राद्ध के लिए इसी समय को सबसे शुभ माना गया है। विदेश में रहने वाले लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे अपने स्थानीय समय के अनुसार अपराह्न काल में ही श्राद्ध कर्म करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध का उद्देश्य पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। इसलिए, तिथि को लेकर बहुत अधिक उलझन में पड़ने के बजाय, श्रद्धा और भक्ति के साथ अनुष्ठान करना अधिक महत्वपूर्ण है।
कई विद्वानों का सुझाव है कि यदि संभव हो, तो भारत में रहने वाले परिवार के सदस्यों से संपर्क करके एक ही समय पर श्राद्ध करने का प्रयास किया जा सकता है। इससे परिवार में एकता बनी रहती है और पितृ कार्य भी संपन्न हो जाते हैं।
अंततः, श्राद्ध का मुख्य आधार मन की पवित्रता और पूर्वजों के प्रति सम्मान है। चाहे तिथि का निर्धारण किसी भी पंचांग से किया जाए, मुख्य उद्देश्य पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करना ही होना चाहिए।