पुतिन की नई पहल: अमेरिका के प्रभाव से मुक्त एससीओ बैंक बनाने की योजना पर विचार
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के साथ मिलकर एक नई बैंक प्रणाली स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। लोकमत की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन का लक्ष्य ऐसी वित्तीय व्यवस्था बनाना है जिस पर अमेरिका का नियंत्रण न हो। उन्होंने बताया कि एससीओ देशों के साथ रूस का अधिकांश व्यापार अब राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। लोकमत की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन एक ऐसी नई बैंक प्रणाली विकसित करना चाहते हैं जो अमेरिकी वित्तीय प्रभाव और प्रतिबंधों से पूरी तरह मुक्त हो। यह पहल सदस्य देशों के बीच व्यापार को अधिक स्वतंत्र और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से की गई है।
पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि एससीओ सदस्य देशों के साथ रूस का व्यापारिक संबंध लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि इन देशों के साथ रूस का कुल व्यापार 400 अरब डॉलर से अधिक का है। यह आंकड़ा संगठन की बढ़ती आर्थिक शक्ति को दर्शाता है, जो वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण आर्थिक ब्लॉक के रूप में उभर रहा है।
वित्तीय स्वायत्तता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साझा करते हुए पुतिन ने बताया कि एससीओ देशों के साथ रूस के 98 प्रतिशत से अधिक लेनदेन अब राष्ट्रीय मुद्राओं में किए जा रहे हैं। यह कदम अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करने की रूस की रणनीति का हिस्सा है। इससे सदस्य देशों को अपनी मुद्रा को मजबूत करने और बाहरी आर्थिक दबावों से बचने में मदद मिल रही है।
एससीओ, जिसमें भारत और चीन जैसे प्रमुख देश शामिल हैं, वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। पुतिन की यह योजना इस संगठन को और अधिक प्रभावशाली बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है। यदि यह नई बैंक प्रणाली अस्तित्व में आती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में एक बड़ा बदलाव ला सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह कदम पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों के जवाब में एक रणनीतिक बदलाव है। रूस और चीन के नेतृत्व वाला यह समूह अब अपनी स्वतंत्र वित्तीय संरचना बनाने की ओर अग्रसर है, ताकि वे अपनी आर्थिक नीतियों को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के लागू कर सकें।
इस नई बैंक प्रणाली के गठन से सदस्य देशों के बीच निवेश और व्यापार के नए अवसर खुल सकते हैं। यह न केवल सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं को स्थिरता प्रदान करेगा, बल्कि उन्हें वैश्विक वित्तीय बाजार में एक नई पहचान भी दिलाएगा।
आने वाले समय में, एससीओ की बैठकों में इस बैंक प्रणाली के ढांचे और कार्यप्रणाली पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। यह देखना दिलचस्प होगा कि सदस्य देश इस प्रस्ताव का समर्थन किस प्रकार करते हैं और यह वैश्विक वित्तीय परिदृश्य को किस तरह प्रभावित करता है।
