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प्रधानमंत्री आवास योजना: बरेली में 2344 बेघर परिवारों को नौ साल बाद भी नहीं मिला अपना आशियाना

बरेली में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर पाने की उम्मीद में 2344 परिवार नौ साल से भटक रहे हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, बिल्डरों ने सरकारी अनुदान तो ले लिया, लेकिन एक दशक बीतने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं किया है। इससे लाभार्थियों में भारी निराशा है और वे लंबे समय से अपने हक की छत का इंतजार कर रहे हैं।

बरेली में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों के लिए एक दशक का समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले के 2344 बेघर परिवार पिछले नौ वर्षों से अपने सपनों के घर के आवंटन का इंतजार कर रहे हैं। इन लोगों ने सरकारी योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन अब तक उन्हें छत नसीब नहीं हो सकी है।

इस मामले में बिल्डरों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बताया गया है कि आवास निर्माण के नाम पर बिल्डरों ने सरकार से अनुदान की राशि तो प्राप्त कर ली, लेकिन निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने में पूरी तरह विफल रहे। सरकारी नियमों के अनुसार काम दो साल के भीतर पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन एक दशक का समय बीतने के बाद भी काम अधूरा पड़ा है।

योजना के तहत जिन परिवारों को घर मिलने थे, वे अब भी किराए के मकानों या अन्य अस्थाई ठिकानों पर रहने को मजबूर हैं। नौ साल का लंबा इंतजार इन परिवारों के लिए आर्थिक और मानसिक परेशानी का कारण बन गया है। लाभार्थियों का कहना है कि उन्होंने अपनी जमा-पूंजी भी इस उम्मीद में लगा दी थी कि उन्हें जल्द ही अपना घर मिल जाएगा।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, बिल्डरों की इस लेटलतीफी ने पूरी परियोजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी अनुदान लेने के बावजूद काम को बीच में ही छोड़ देना या बेहद धीमी गति से चलाना प्रशासन की निगरानी पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय लोग अब इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें उनका हक मिल सके।

प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। लाभार्थियों का कहना है कि वे कई बार संबंधित अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन बिल्डरों के खिलाफ क्या कदम उठाता है और कब तक इन परिवारों को उनके घर की चाबियां मिल पाती हैं।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला ब्यूरो, बरेलीमूल रिपोर्ट देखें ↗