प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली में पर्यावरण सम्मेलन का किया उद्घाटन, एनजीटी मोबाइल ऐप भी लॉन्च की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में 'पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन का भविष्य' विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया। सम्मेलन में वैश्विक स्तर पर जलवायु चुनौतियों और सतत विकास पर चर्चा के लिए विभिन्न देशों के विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन का भविष्य' का उद्घाटन किया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने प्रकृति के साथ भारत के गहरे ऐतिहासिक संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राचीन सांस्कृतिक ज्ञान आधुनिक जलवायु समाधानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। प्रधानमंत्री ने एनजीटी के प्रयासों की सराहना करते हुए इस सम्मेलन के दौरान एनजीटी का नया मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया, जो पर्यावरण संबंधी शिकायतों के निवारण में सहायक होगा।
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पर्यावरण न्यायशास्त्र पर जोर देते हुए कहा कि प्रदूषण मुक्त पर्यावरण का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को समानता और स्वास्थ्य से जोड़ते हुए वैश्विक सहयोग का आह्वान किया। वहीं, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि भारत ने अपने गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्यों को समय से पहले ही प्राप्त कर लिया है और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
सम्मेलन में 17 देशों के न्यायविद, वैज्ञानिक और नीति निर्माता भाग ले रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण कानून को मजबूत करना, जलवायु न्याय को बढ़ावा देना और सतत विकास के लिए एक रोडमैप तैयार करना है। तकनीकी सत्रों के माध्यम से विशेषज्ञ ऊर्जा संक्रमण, हरित अवसंरचना और जलवायु कार्रवाई जैसे विषयों पर अपने विचार साझा कर रहे हैं।
महान्यायवादी आर. वेंकटरमानी ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि व्यावहारिक और लागू करने योग्य तंत्रों की आवश्यकता है। उन्होंने एक नए वैश्विक पर्यावरणीय नियामक ढांचे की वकालत की। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है और यह सम्मेलन वैश्विक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह दो दिवसीय आयोजन पर्यावरण और जलवायु शासन के विभिन्न पहलुओं को कवर कर रहा है। इसमें चार तकनीकी सत्र शामिल हैं, जो जलवायु न्याय, समानता, हरित वित्त और टिकाऊ शहरों जैसे विषयों पर केंद्रित हैं। सम्मेलन का उद्देश्य भविष्य के सहयोग के लिए व्यावहारिक सिफारिशें विकसित करना और नवाचारों को साझा करना है।
भारत का यह प्रयास न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक स्तर पर भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। सतत विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की भारत की नीति दुनिया के लिए एक उदाहरण बन रही है। इस सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक हितधारक एक साथ आकर जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियों पर सहयोगात्मक कार्रवाई करने के लिए विचार-विमर्श कर रहे हैं।
