प्रधानमंत्री मोदी ने पर्यावरण सम्मेलन में जलवायु समाधानों पर जोर दिया, भारत की प्रगति को सराहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि भारत विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चल रहा है और पेरिस समझौते की प्रतिबद्धताओं को समय से पहले पूरा करने वाला जी-20 का एकमात्र देश है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 'पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन का भविष्य' विषय पर आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने प्राचीन सांस्कृतिक ज्ञान और आधुनिक जलवायु समाधानों के बीच के संबंध पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज वैश्विक जलवायु चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रदान कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने कार्बन उत्सर्जन को लेकर वैश्विक धारणाओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि विकासशील देशों को अनुचित रूप से दोषी ठहराया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधे से भी कम है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की पारंपरिक पर्यावरणीय क्षमताओं को प्रदर्शित करने के महत्व पर जोर दिया।
पिछले 12 वर्षों में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में हुए बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत जी-20 देशों में एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जिसने कॉप-21 शिखर सम्मेलन में किए गए वादों को समय सीमा से पहले पूरा किया है। सौर ऊर्जा क्षमता में 2 गीगावाट से 160 गीगावाट तक की वृद्धि इसका प्रमाण है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 50 लाख से अधिक घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है। इसके अलावा, कुसुम योजना के माध्यम से 30 लाख किसानों को सौर पंप उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने पवन ऊर्जा, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण विस्तार की जानकारी दी।
परिवहन क्षेत्र में आ रहे बदलावों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ की घोषणा की। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में 950 गुना वृद्धि और मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रेलवे के विद्युतीकरण और समर्पित माल ढुलाई गलियारों से डीजल की खपत में भारी कमी आई है।
जल संरक्षण के क्षेत्र में 'कैच द रेन' अभियान और अमृत सरोवरों के निर्माण को उन्होंने जनभागीदारी का एक बड़ा उदाहरण बताया। कृषि क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और मोटे अनाज (श्री अन्न) के उत्पादन में वृद्धि को भी उन्होंने जलवायु अनुकूल कदम बताया।
अंत में, प्रधानमंत्री ने प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए 'कचरे से धन' मॉडल और गोबरधन योजना की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत का विकास तीव्र और सतत दोनों है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन पर्यावरण संरक्षण के लिए नवीन समाधान प्रस्तुत करेगा।
