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प्रयागराज: राजकीय आईटीआई में आउटसोर्सिंग के जरिए फोरमैन अनुदेशक भर्ती पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से फोरमैन अनुदेशक के पदों को भरने की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने इस संबंध में जारी शासनादेश पर सवाल उठाते हुए अगली सुनवाई तक भर्ती प्रक्रिया को स्थगित करने का निर्देश दिया है। यह फैसला राज्य के विभिन्न आईटीआई में कार्यरत तकनीकी स्टाफ और भर्ती नियमों को लेकर चल रही कानूनी चर्चा के बीच आया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में एक महत्वपूर्ण कानूनी हस्तक्षेप किया है। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा आउटसोर्सिंग के माध्यम से फोरमैन अनुदेशक के पदों को भरने के लिए जारी किए गए शासनादेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।

अमर उजाला नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया के तौर-तरीकों पर संज्ञान लेते हुए यह निर्देश जारी किए हैं। सरकारी आईटीआई में तकनीकी पदों पर आउटसोर्सिंग के जरिए नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से बहस चल रही थी, जिस पर अब न्यायिक हस्तक्षेप हुआ है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक इन पदों पर कोई भी नई नियुक्ति नहीं की जाएगी। यह निर्णय उन सभी उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है जो इन संस्थानों में भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे थे।

आईटीआई में अनुदेशकों की भूमिका तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में आउटसोर्सिंग के माध्यम से इन पदों को भरने के सरकारी निर्णय को चुनौती दी गई थी, जिसके बाद अदालत ने यह अंतरिम आदेश पारित किया है।

राज्य सरकार को अब इस मामले में अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। अदालत की अगली कार्यवाही में यह तय होगा कि क्या आउटसोर्सिंग के जरिए भर्ती का यह मॉडल नियमों के अनुकूल है या नहीं।

फिलहाल, इस आदेश के बाद संबंधित विभागों में भर्ती प्रक्रिया थम गई है। प्रशासनिक अधिकारियों को अब अदालत के अगले निर्देशों का पालन करना होगा।

यह मामला प्रदेश के तकनीकी शिक्षा ढांचे में सुधार और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग को भी रेखांकित करता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का यह रुख सरकारी भर्ती नियमों की व्याख्या के लिहाज से अहम है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराजमूल रिपोर्ट देखें ↗