प्रधानमंत्री मोदी ने नशा मुक्त भारत के लिए 100 सप्ताह के राष्ट्रव्यापी अभियान का किया शुभारंभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान' की शुरुआत की है। इस 100 सप्ताह के जन-भागीदारी कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखकर उन्हें स्वस्थ और सशक्त बनाना है। प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं से इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया है, ताकि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 'विकसित भारत के लिए नशा मुक्त युवा संकल्प अभियान' का औपचारिक शुभारंभ किया। इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान, प्रधानमंत्री ने 28,000 से अधिक स्थानों से जुड़े एक करोड़ से अधिक युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने इस पहल को देश के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण सामूहिक संकल्प करार दिया।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार, समाज और राष्ट्र की समग्र मजबूती से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए युवा पीढ़ी का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं को नशे की विनाशकारी आदतों से दूर रहने की सलाह दी।
यह अभियान पिछले वर्ष काशी से एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू किया गया था। अब इसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया गया है, जिसमें 125 से अधिक आध्यात्मिक और गैर-सरकारी संगठनों का सहयोग शामिल है। केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने बताया कि यह मिशन 'मेरा युवा भारत' (MY Bharat) मंच के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
अभियान की 100 सप्ताह की कार्य योजना के तहत, प्रत्येक रविवार को कला, खेल, संस्कृति और ध्यान से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले 100 रविवार नशा मुक्त भारत की दिशा में 100 सशक्त कदम साबित होंगे। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा को देश के विकास के लिए अमूल्य बताया।
प्रधानमंत्री ने नशे के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह लत न केवल व्यक्ति के करियर को बर्बाद करती है, बल्कि परिवारों को भी गहरे संकट में डालती है। उन्होंने युवाओं को स्टार्टअप, अंतरिक्ष और एआई जैसे क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
सरकार ने नशा मुक्ति के लिए व्यापक सहायता प्रणालियों, जैसे योग, ध्यान और पुनर्वास केंद्रों के महत्व पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से भी अपील की कि वे शैक्षणिक परिसरों में नशा विरोधी चर्चाओं को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाएं। उन्होंने नशा छोड़ने वाले युवाओं को 'सच्चा योद्धा' बताते हुए समाज से उन्हें सम्मान देने का आग्रह किया।
अपने संबोधन के अंत में, प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों के तस्करों के खिलाफ सरकार की कड़ी कार्रवाई का उल्लेख किया। उन्होंने युवाओं को आश्वस्त किया कि इस लड़ाई में सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश के युवा अपनी ऊर्जा की रक्षा करेंगे और विकसित भारत के संकल्प को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
