फिल्म 'धुरंधर' में पुराने गानों के इस्तेमाल पर गीतकार समीर अंजान ने जताई कड़ी नाराजगी
गीतकार समीर अंजान ने फिल्म 'धुरंधर' में पुराने गानों के बैकग्राउंड इस्तेमाल को लेकर अपनी असहमति जाहिर की है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में संगीत के बदलते स्वरूप और नए संगीतकारों के काम करने के तरीके पर भी चर्चा की। समीर का मानना है कि पुराने गानों के साथ छेड़छाड़ या उनका अनावश्यक उपयोग सही नहीं है। इस मुद्दे पर उन्होंने अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इंडस्ट्री के वर्तमान हालातों पर चिंता जताई है।

फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने गीतकार समीर अंजान ने हाल ही में संगीत के बदलते दौर पर खुलकर बात की है। उन्होंने फिल्म 'धुरंधर' में पुराने गानों के इस्तेमाल को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। समीर का मानना है कि पुरानी धुनों को बैकग्राउंड में इस्तेमाल करना रचनात्मकता की कमी को दर्शाता है।
समीर अंजान ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में आजकल संगीत के साथ जो प्रयोग हो रहे हैं, वे हमेशा सही दिशा में नहीं हैं। उन्होंने विशेष रूप से 'धुरंधर' फिल्म का जिक्र करते हुए कहा कि पुराने गानों का उपयोग करने का तरीका उन्हें पसंद नहीं आया।
गीतकार ने फिल्म इंडस्ट्री के नए संगीतकारों के काम करने के तरीके पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने संकेत दिया कि नए दौर के संगीत में वह गहराई नहीं है जो पुराने गानों में हुआ करती थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौलिकता का महत्व हमेशा बना रहना चाहिए।
समीर अंजान की यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया और फिल्म गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पुराने गानों के सम्मान के पक्षधर हैं और उनका गलत तरीके से उपयोग उन्हें स्वीकार्य नहीं है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, समीर अंजान ने फिल्म इंडस्ट्री के संगीत में आ रहे बदलावों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि संगीतकारों को नए और मौलिक धुन बनाने पर अधिक ध्यान देना चाहिए, न कि पुराने गानों के सहारे फिल्म को आगे बढ़ाना चाहिए।
यह पहली बार नहीं है जब किसी दिग्गज कलाकार ने पुराने गानों के रीमिक्स या इस्तेमाल पर सवाल उठाए हों। समीर अंजान का यह बयान फिल्म इंडस्ट्री में चल रही पुरानी बनाम नई बहस को और हवा दे सकता है।
अंत में, समीर ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में संगीतकार अपनी मौलिकता पर ध्यान देंगे और दर्शकों को बेहतर संगीत सुनने को मिलेगा। उनका मानना है कि संगीत का असली आनंद नई रचनाओं में ही निहित है।
