फिल्म 'धुरंधर' में पुराने गानों के इस्तेमाल पर भड़के समीर अंजान, कहा- सब सत्यानाश कर दिया
फिल्म निर्माता आदित्य धर की 'धुरंधर' फ्रैंचाइजी में पुराने गानों को रीक्रिएट किए जाने पर गीतकार समीर अंजान ने नाराजगी जताई है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, समीर ने 'ना तो कारवां की तलाश है' और 'रंबा हो' जैसे गानों के दोबारा इस्तेमाल की आलोचना करते हुए कहा कि इससे गानों का मूल स्वरूप खराब हो गया है।
VIMARSHNAARAD TVफिल्म निर्माता आदित्य धर की आने वाली 'धुरंधर' फ्रैंचाइजी को लेकर विवाद शुरू हो गया है। इस फिल्म में कई पुराने और सदाबहार गानों को रीक्रिएट किया गया है, जिसे लेकर गीतकार समीर अंजान ने अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, समीर ने इन गानों के दोबारा इस्तेमाल को लेकर फिल्म निर्माताओं की आलोचना की है।
फिल्म में 'ना तो कारवां की तलाश है' और 'रंबा हो' जैसे लोकप्रिय पुराने गानों को नए सिरे से पेश किया गया है। समीर अंजान का मानना है कि इन गानों के साथ छेड़छाड़ करना गलत है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पुराने गानों को दोबारा इस्तेमाल करके उनका सत्यानाश कर दिया गया है।
समीर अंजान का यह बयान सोशल मीडिया और फिल्म जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने पुराने गानों की मूल भावना और उनके संगीत के साथ किए गए बदलावों पर असंतोष व्यक्त किया है। उनके अनुसार, क्लासिक गानों को उनकी मौलिकता के साथ ही रहने देना चाहिए।
आदित्य धर की इस फ्रैंचाइजी में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म के संगीत को लेकर हो रही यह आलोचना फिल्म के प्रचार के दौरान एक बड़ा मुद्दा बन गई है। हालांकि, फिल्म निर्माताओं की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
पुराने गानों को रीक्रिएट करने का चलन बॉलीवुड में नया नहीं है, लेकिन अक्सर इसे लेकर संगीतकारों और श्रोताओं के बीच मतभेद देखने को मिलते हैं। समीर अंजान का यह रुख उन लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जो मूल संगीत की शुद्धता को बनाए रखने के पक्ष में हैं।
एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, समीर अंजान ने इस बात पर जोर दिया है कि पुराने गानों के साथ प्रयोग करने से उनकी विरासत को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से अपील की है कि वे नई रचनाओं पर ध्यान दें बजाय इसके कि पुराने गानों को खराब करें।
यह मामला एक बार फिर बॉलीवुड में रीमिक्स और रीक्रिएशन की संस्कृति पर बहस को जन्म दे रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या फिल्म निर्माता इस आलोचना पर कोई कदम उठाते हैं या फिल्म अपने पुराने गानों के संस्करणों के साथ ही रिलीज होती है।