फिल्म रिव्यू: अरशद वारसी की 'जीवन या भीमा' में डबल रोल का प्रयोग रहा बेअसर
अरशद वारसी की नई फिल्म 'जीवन या भीमा' दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई है। फिल्म में अरशद का डबल रोल है, लेकिन कहानी और कॉमेडी का तालमेल सही नहीं बैठ सका। फिल्म के दौरान दर्शकों को हंसी के बजाय यह सवाल परेशान करता रहा कि यह फिल्म कब खत्म होगी।
VIMARSHNAARAD TVअरशद वारसी की फिल्मों से दर्शकों को हमेशा बेहतरीन कॉमेडी की उम्मीद रहती है। उनकी हालिया रिलीज 'जीवन या भीमा' से भी प्रशंसकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन फिल्म देखने के बाद निराशा हाथ लगी। फिल्म का कथानक और उसका प्रस्तुतीकरण दर्शकों को बांधने में असफल रहा।
फिल्म की कहानी एक ऐसे पति के इर्द-गिर्द घूमती है जो कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। उसकी पत्नी भी अपनी समस्याओं से परेशान है। शुरुआत में फिल्म कुछ उम्मीदें जगाती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह अपनी लय खो देती है।
अरशद वारसी ने फिल्म में दोहरी भूमिका निभाई है, लेकिन उनका यह प्रयोग बेअसर साबित हुआ। अभिनय के स्तर पर फिल्म में कुछ खास नयापन देखने को नहीं मिला, जो दर्शकों को लंबे समय तक याद रहे।
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी पटकथा और कॉमेडी का कमजोर होना है। एक कॉमेडी फिल्म से जिस तरह के मनोरंजन की उम्मीद की जाती है, वह इस फिल्म में नदारद है। फिल्म के दृश्य दर्शकों को हंसाने में पूरी तरह नाकाम रहे।
अमर उजाला की समीक्षा के अनुसार, फिल्म देखते समय दर्शकों के मन में बार-बार यह सवाल उठता रहा कि यह कब खत्म होगी। यह इस बात का संकेत है कि फिल्म दर्शकों का ध्यान खींचने में पूरी तरह विफल रही है।
फिल्म में विजय राज और संजीदा शेख जैसे कलाकार भी मौजूद हैं, लेकिन कमजोर लेखन के कारण वे भी फिल्म को बचाने में सफल नहीं हो सके। कलाकारों का अभिनय फिल्म की खामियों को छिपाने के लिए पर्याप्त नहीं था।
कुल मिलाकर, 'जीवन या भीमा' एक ऐसी फिल्म है जो अरशद वारसी के प्रशंसकों को भी निराश कर सकती है। फिल्म में न तो कोई दमदार कहानी है और न ही वह कॉमेडी जो दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच सके।