फैक्ट चेक: सेना प्रमुख के बारे में वायरल वीडियो भ्रामक, पाकिस्तान से संचालित अकाउंट ने फैलाया झूठ
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया गया है कि भारतीय सेना प्रमुख धीरज सेठ एक मेजर की पत्नी के साथ अनुचित व्यवहार कर रहे हैं। न्यूजमीटर की फैक्ट चेक रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी है और इसे एआई तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है। इस भ्रामक सामग्री को पाकिस्तान से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट द्वारा प्रसारित किया गया था।
VIMARSHNAARAD TVहाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो तेजी से फैल रहा है, जिसमें भारतीय सेना प्रमुख धीरज सेठ को एक मेजर की पत्नी के साथ नृत्य करते और अनुचित व्यवहार करते हुए दिखाया गया है। इस वीडियो ने इंटरनेट पर काफी हलचल मचा दी है और कई लोग इसे सच मानकर साझा कर रहे हैं।
न्यूजमीटर की एक विस्तृत फैक्ट चेक रिपोर्ट में इस दावे का खंडन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वायरल हो रहा वीडियो पूरी तरह से फर्जी है और इसमें दिखाई गई सामग्री का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। यह वीडियो एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक का उपयोग करके तैयार किया गया है ताकि लोगों को गुमराह किया जा सके।
जांच में यह भी पाया गया कि इस भ्रामक वीडियो को फैलाने के पीछे पाकिस्तान से संचालित एक सोशल मीडिया अकाउंट का हाथ है। इस तरह के दुष्प्रचार का उद्देश्य भारतीय सेना की छवि को धूमिल करना और देश में भ्रम की स्थिति पैदा करना प्रतीत होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डीपफेक तकनीक का उपयोग करके किसी भी व्यक्ति का चेहरा और आवाज बदलकर उसे गलत संदर्भ में पेश करना अब आसान हो गया है। इस मामले में सेना प्रमुख जैसे उच्च पदस्थ अधिकारी को निशाना बनाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी किसी भी सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। किसी भी संवेदनशील वीडियो को बिना आधिकारिक पुष्टि के सच मानना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला है।
न्यूजमीटर ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि वीडियो में दिख रहे दृश्य पूरी तरह से कृत्रिम हैं और इसे तकनीकी हेरफेर के जरिए बनाया गया है। इस तरह की भ्रामक जानकारी फैलाने वाले अकाउंट्स पर नजर रखी जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
यह घटना एक बार फिर डिजिटल युग में सूचनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। नागरिकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि वे विदेशी ताकतों द्वारा फैलाए जा रहे दुष्प्रचार का शिकार न बनें। सेना प्रमुख के बारे में फैलाया गया यह दावा पूरी तरह से निराधार और दुर्भावनापूर्ण है।