बच्चों के कान में दर्द होने पर घबराएं नहीं, विशेषज्ञ ने साझा किए राहत पाने के आसान उपाय
एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के कान में दर्द होने पर हमेशा संक्रमण ही कारण नहीं होता है। पीडियाट्रिशियन का कहना है कि दर्द के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। रात के समय बच्चे को बेचैनी होने पर माता-पिता को घबराने के बजाय सही जानकारी के साथ स्थिति को संभालना चाहिए। विशेषज्ञ ने कुछ घरेलू उपायों और सावधानियों के बारे में जानकारी दी है जो बच्चे को जल्दी आराम दिलाने में मदद कर सकते हैं।
VIMARSHNAARAD TVएनडीटीवी इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अक्सर माता-पिता बच्चों के कान में दर्द की शिकायत सुनकर चिंतित हो जाते हैं। पीडियाट्रिशियन का स्पष्ट मानना है कि कान में होने वाली हर तकलीफ का संबंध कान के संक्रमण से नहीं होता है। दर्द के पीछे कई अन्य शारीरिक कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रात के समय जब बच्चा कान दर्द से रोने लगे, तो सबसे पहले शांत रहकर स्थिति का आकलन करना चाहिए। कान में दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि कान में पानी का जाना, कान में वैक्स का जमा होना या फिर गले में खराश के कारण कान तक दर्द का पहुंचना।
डॉक्टरों का सुझाव है कि यदि बच्चा बहुत छोटा है और अपनी तकलीफ बोलकर नहीं बता पा रहा है, तो उसके व्यवहार पर ध्यान दें। बार-बार कान को छूना या उसे खींचना दर्द का एक प्रमुख संकेत हो सकता है। ऐसे में बच्चे को सीधा लिटाने के बजाय थोड़ा ऊंचा सहारा देकर सुलाने से दबाव कम हो सकता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कान में दर्द होने पर बिना किसी चिकित्सीय सलाह के कोई भी तेल या दवा कान के अंदर नहीं डालनी चाहिए। ऐसा करना बच्चे के नाजुक कान के पर्दे के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। घरेलू उपचार के तौर पर केवल बाहरी हिस्से पर हल्की सिकाई या डॉक्टर द्वारा सुझाई गई सावधानियां ही अपनानी चाहिए।
यदि दर्द के साथ बच्चे को तेज बुखार है या कान से किसी तरह का तरल पदार्थ निकल रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
अंत में, विशेषज्ञों का जोर इस बात पर है कि माता-पिता को घबराहट में गलत कदम उठाने से बचना चाहिए। सही समय पर सही सलाह लेना ही बच्चे की तकलीफ को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।