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बढ़ते तापमान और बाढ़ के खतरे पर वैज्ञानिक की चेतावनी, भारत के लिए जताई चिंता

जलवायु वैज्ञानिक टापियो श्नाइडर ने भारत में बढ़ती गर्मी और बाढ़ के बढ़ते खतरों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सुझाव दिया है कि शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को केवल बारिश तक सीमित न रखकर अचानक आने वाली बाढ़ जैसी आपदाओं को भी शामिल करना चाहिए। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के कारण उत्पन्न हो रही इन चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर तैयारी पर जोर दिया है।

बढ़ते तापमान और बाढ़ के खतरे पर वैज्ञानिक की चेतावनी, भारत के लिए जताई चिंता
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: Alan Murray-Rust · CC BY-SA 2.0 · Openverse

जलवायु वैज्ञानिक टापियो श्नाइडर ने हाल ही में भारत में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि धरती का बढ़ता तापमान न केवल गर्मी बढ़ा रहा है, बल्कि बाढ़ के जोखिम को भी काफी अधिक कर रहा है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, श्नाइडर ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत में आपदा प्रबंधन की मौजूदा प्रणालियों में बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को केवल सामान्य बारिश के पूर्वानुमान तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए।

वैज्ञानिक का मानना है कि अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड्स) जैसी आपदाएं अब अधिक खतरनाक होती जा रही हैं, इसलिए चेतावनी प्रणालियों में इन घटनाओं को भी शामिल करना अनिवार्य है। उन्होंने भारत में बढ़ती गर्मी और इसके परिणामस्वरूप होने वाली मौसमी अनिश्चितताओं पर गहरी चिंता जताई है।

जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। श्नाइडर के अनुसार, इन चुनौतियों का सामना करने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और बेहतर बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में इस तरह की आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ सकती है, जिससे निपटने के लिए सरकार और संबंधित एजेंसियों को अपनी तैयारियों को और अधिक मजबूत करना होगा।

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब भारत के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी और बेमौसम बारिश का सामना करना पड़ रहा है। वैज्ञानिक का यह सुझाव नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि वे आपदा प्रबंधन की अपनी रणनीतियों को आधुनिक बनाएं।

अंत में, श्नाइडर ने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन के खतरों को कम करने के लिए केवल प्रतिक्रिया देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सक्रिय रूप से पूर्व-तैयारी करना ही एकमात्र रास्ता है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01नवभारत टाइम्समूल रिपोर्ट देखें ↗