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बरेली में अरिल नदी के किनारे भू-जल संकट: 60 गांवों में पानी की गुणवत्ता हुई बेहद खराब

बरेली में अरिल नदी के किनारे बसे 60 गांवों में भू-जल की गुणवत्ता चिंताजनक स्तर तक गिर गई है। एक हालिया सर्वे में सामने आया है कि कई स्थानों पर पानी में टीडीएस की मात्रा सामान्य से 10 गुना अधिक पाई गई है। हजारों परिवार वर्षों से इसी दूषित पानी पर निर्भर हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

बरेली जिले में अरिल नदी के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों के लिए एक गंभीर समस्या सामने आई है। हाल ही में किए गए एक सर्वे से पता चला है कि इन क्षेत्रों में भू-जल की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है। लगभग 60 गांवों के लोग इस जल संकट से सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

सर्वेक्षण के दौरान यह पाया गया कि कई स्थानों पर पानी में टीडीएस (टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स) का स्तर निर्धारित मानकों से 10 गुना अधिक है। यह स्थिति स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है, जो वर्षों से इसी पानी का उपयोग पीने और दैनिक कार्यों के लिए कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से इसी स्रोत पर निर्भर हैं, लेकिन अब पानी का स्वाद और रंग दोनों बदल गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इतना अधिक टीडीएस वाला पानी पीना किडनी और अन्य आंतरिक अंगों के लिए हानिकारक हो सकता है।

यह समस्या अरिल नदी के किनारे बसे गांवों में विशेष रूप से गंभीर है। लंबे समय से भू-जल के अत्यधिक दोहन और प्रदूषण के कारण जल स्तर और गुणवत्ता दोनों पर बुरा असर पड़ा है।

प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है क्योंकि इन गांवों में वैकल्पिक जल आपूर्ति की व्यवस्था करना एक जटिल कार्य है। हजारों परिवारों की निर्भरता इस दूषित भू-जल पर होने के कारण स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है।

स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि सरकार और संबंधित विभाग इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें। वे शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील कर रहे हैं ताकि भविष्य में किसी बड़ी स्वास्थ्य आपदा को टाला जा सके।

फिलहाल, इस सर्वे के नतीजों ने क्षेत्र में एक नई बहस छेड़ दी है। पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि समय रहते भू-जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01संवाद न्यूज एजेंसी, बरेलीमूल रिपोर्ट देखें ↗