बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य: हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की रणनीतिक कमजोरी का उठाया फायदा
यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। साल 2015 से जारी इस तनाव के बीच 2022 में एक संघर्ष विराम हुआ था, जिससे कुछ समय के लिए शांति बनी रही। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अपनी पकड़ मजबूत कर सऊदी अरब की रणनीतिक कमजोरियों का लाभ उठाया है।
VIMARSHNAARAD TVयमन का संघर्ष पिछले कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। साल 2015 में शुरू हुए इस संघर्ष में सऊदी अरब समर्थित यमनी बलों और हूती विद्रोहियों के बीच तीखी लड़ाई देखी गई थी।
लंबे समय तक चले इस युद्ध के बाद, साल 2022 में एक संघर्ष विराम समझौता हुआ था। इस समझौते ने यमन में कुछ वर्षों के लिए शांति की उम्मीद जगाई थी और हिंसा में काफी कमी आई थी।
हालांकि, यह शांति स्थायी नहीं रही। हूती विद्रोहियों ने इस दौरान अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने और रणनीतिक स्थानों पर नियंत्रण हासिल करने पर ध्यान केंद्रित किया।
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य, जो वैश्विक व्यापार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, इस संघर्ष का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। हूती विद्रोहियों ने इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की रणनीतिक कमजोरियों को भांप लिया था और वे लगातार उन बिंदुओं पर दबाव बना रहे हैं जो सऊदी अरब के लिए संवेदनशील हैं।
इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण या प्रभाव होने से हूती विद्रोही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे हैं। यह स्थिति सऊदी अरब के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
वर्तमान में, यमन की स्थिति जटिल बनी हुई है। संघर्ष विराम के बावजूद, हूती विद्रोहियों की बढ़ती सक्रियता ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है।