बिश्केक में पीएम मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से मुलाकात की। अमेरिकी प्रतिबंधों और दबावों के बीच हुई यह बैठक दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों को दर्शाती है। इस दौरान पीएम मोदी ने द्विपक्षीय सहयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिससे भारत और ईरान के कूटनीतिक संबंधों में नई गति आने की संभावना है।

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन के दौरान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान को लेकर अमेरिका का रुख काफी सख्त बना हुआ है और कई तरह के प्रतिबंधों की चर्चाएं चल रही हैं।
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी धमकियों और वैश्विक दबावों के बावजूद भारत और ईरान के बीच बढ़ती निकटता इस बैठक का मुख्य केंद्र रही। दोनों नेताओं ने आपसी हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक बड़ा ऐलान किया, जो दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग की दिशा तय करने में सहायक हो सकता है।
एससीओ शिखर सम्मेलन के मंच का उपयोग करते हुए दोनों देशों ने अपने संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने का संकल्प लिया। विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग के दृष्टिकोण से काफी मायने रखती है। भारत और ईरान के बीच ऊर्जा और व्यापारिक संबंधों को लेकर पहले भी कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जिन्हें इस मुलाकात के बाद नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच हुई यह बातचीत स्पष्ट करती है कि भारत अपनी विदेश नीति के तहत स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम है। वैश्विक भू-राजनीति में चल रहे बदलावों के बीच, भारत का यह कदम रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाता है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने इस दौरान आपसी सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने पर भी सहमति जताई है।
इस बैठक के बाद जारी संकेतों से स्पष्ट है कि भारत और ईरान आने वाले समय में अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, अमेरिकी रुख को लेकर दोनों देशों के बीच कोई सीधा टकराव नहीं दिखा, बल्कि कूटनीतिक संवाद के जरिए अपने हितों को साधने का प्रयास किया गया।
शंघाई सहयोग संगठन के इस मंच ने भारत को अपने पड़ोसी और मित्र देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान किया है। बिश्केक में हुई यह मुलाकात न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए भी एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
