बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन: मोदी, पुतिन और जिनपिंग की मौजूदगी से वैश्विक राजनीति में हलचल
किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक साथ उपस्थिति को वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह तिकड़ी ब्रिक्स सम्मेलन से पहले एक महत्वपूर्ण संकेत दे रही है, जिससे अमेरिका में भी चिंता का माहौल है।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हाल ही में संपन्न हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक साथ दिखना वैश्विक समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुई है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती है। इन तीन बड़े नेताओं की उपस्थिति ने यूरेशियाई एकता की दिशा में एक नया संदेश दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह के भू-राजनीतिक तनाव देखे जा रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस तिकड़ी के एक साथ आने से अमेरिका में बेचैनी बढ़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप के संदर्भ में, इस गठबंधन को एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक राजनीति में शक्ति का संतुलन किस ओर झुक रहा है, इस पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं।
बिश्केक में हुई इस बैठक के दौरान विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की गई। SCO के सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया, जो भविष्य की रणनीतिक साझेदारी के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत, रूस और चीन का एक मंच पर होना यह दर्शाता है कि एशिया की भूमिका वैश्विक मंच पर लगातार बढ़ रही है। यह न केवल आर्थिक बल्कि सुरक्षा और कूटनीतिक दृष्टिकोण से भी एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
हालांकि, इस सम्मेलन के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं। जहां कुछ देश इसे स्थिरता के रूप में देख रहे हैं, वहीं कुछ इसे नई गुटबाजी के रूप में भी आंक रहे हैं।
आने वाले दिनों में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान इन नेताओं की बातचीत और भी स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, बिश्केक की यह बैठक वैश्विक राजनीति के बदलते स्वरूप को समझने के लिए एक प्रमुख केंद्र बनी हुई है।
