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बुलेट ट्रेन से दिल्ली-आगरा की दूरी 58 मिनट में, लखनऊ विश्वविद्यालय में उर्दू छात्रों का टोटा

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाई-स्पीड कॉरिडोर का खाका पेश किया है, जिससे दिल्ली से आगरा और लखनऊ की यात्रा आसान होगी। वहीं दूसरी ओर, लखनऊ विश्वविद्यालय में उर्दू विषय के प्रति छात्रों की रुचि में भारी गिरावट देखी जा रही है, जहां 120 में से केवल 45 सीटें ही भर सकी हैं।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भविष्य की रेल यात्रा को लेकर एक महत्वपूर्ण योजना साझा की है। इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के माध्यम से यात्रियों को दिल्ली से आगरा तक का सफर महज 58 मिनट में पूरा करने की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही, दिल्ली से लखनऊ तक की दूरी भी केवल 2 घंटे 12 मिनट में तय की जा सकेगी। यह परियोजना देश के प्रमुख शहरों के बीच कनेक्टिविटी को नई गति प्रदान करेगी।

दूसरी ओर, शिक्षा के क्षेत्र से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। लखनऊ, जिसे अदब और तहजीब का शहर माना जाता है, वहां के विश्वविद्यालय में उर्दू भाषा के प्रति छात्रों का आकर्षण कम होता दिख रहा है। एक दौर था जब यहां उर्दू की पढ़ाई के लिए छात्रों में होड़ मची रहती थी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है।

विश्वविद्यालय प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, उर्दू विभाग में उपलब्ध 120 सीटों में से इस बार सिर्फ 45 सीटों पर ही प्रवेश हो पाए हैं। बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जाना भाषा के प्रति घटती रुचि को दर्शाता है। यह बदलाव शैक्षणिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

हाई-स्पीड रेल परियोजना जहां बुनियादी ढांचे में बड़े सुधार का संकेत दे रही है, वहीं भाषा और संस्कृति के संरक्षण से जुड़े ऐसे आंकड़े शिक्षाविदों के लिए मंथन का विषय हैं। दोनों ही खबरें उत्तर प्रदेश के बदलते परिदृश्य को दर्शाती हैं।

रेल मंत्री द्वारा प्रस्तुत खाका आने वाले वर्षों में यात्रा के समय को काफी कम कर देगा, जिससे व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वहीं, लखनऊ विश्वविद्यालय का उदाहरण यह सोचने पर मजबूर करता है कि पारंपरिक विषयों की लोकप्रियता को कैसे पुनर्जीवित किया जाए।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों विषयों पर स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा हो रही है। जहां एक ओर तकनीकी विकास की राह खुल रही है, वहीं दूसरी ओर भाषाई विरासत को सहेजने की चुनौती भी सामने है।

आने वाले समय में इन परियोजनाओं और शैक्षणिक रुझानों का क्या असर होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, प्रशासन और विश्वविद्यालय दोनों ही अपने-अपने स्तर पर इन स्थितियों का आकलन करने में जुटे हैं।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरामूल रिपोर्ट देखें ↗02अभिषेक सहज, अमर उजाला, लखनऊमूल रिपोर्ट देखें ↗