बैंक कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा, उच्चस्तरीय वार्ता रही पूरी तरह विफल
उत्तर प्रदेश के आगरा सहित देशभर में बैंक कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर फिर से आंदोलन की राह पर हैं। पांच दिन के कार्य सप्ताह की मांग को लेकर बैंक यूनियनों ने 28 सितंबर से तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के साथ हुई उच्चस्तरीय बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला, जिसके बाद कर्मचारियों ने कड़ा रुख अपना लिया है।
VIMARSHNAARAD TVबैंक कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग अपनी लंबित मांगों को लेकर फिर से लामबंद हो गया है। यूएफबीयू (यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस) ने घोषणा की है कि 28 सितंबर से तीन दिनों तक बैंक कामकाज पूरी तरह ठप रहेगा। यह निर्णय सरकार के साथ हुई वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद लिया गया है।
कर्मचारियों की मुख्य मांग सप्ताह में पांच दिन काम करने की है। उनका तर्क है कि लंबे समय से इस पर विचार करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इस मांग को लेकर कर्मचारी संगठन पूरी तरह अडिग नजर आ रहे हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हड़ताल को लेकर बैंक प्रबंधन और कर्मचारी संगठनों के बीच तनाव बढ़ गया है। यूनियनों ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों द्वारा कर्मचारियों पर हड़ताल में शामिल न होने का दबाव बनाया जा रहा है।
यूनियन नेताओं ने इस दबाव को अनुचित श्रम प्रथा करार दिया है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना उनका अधिकार है और इसे दबाने की कोशिशें गलत हैं। इस स्थिति ने बैंक सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका को और बढ़ा दिया है।
आगरा सहित उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बैंक कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया है। हड़ताल के दौरान बैंकिंग सेवाएं बाधित होने से आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
बैंक प्रबंधन की ओर से अभी तक हड़ताल को टालने के लिए कोई नया प्रस्ताव नहीं दिया गया है। वार्ता विफल होने के बाद अब कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में बैंकिंग कामकाज पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। यदि सरकार और यूनियनों के बीच कोई बीच का रास्ता नहीं निकलता है, तो यह हड़ताल तय समय पर शुरू हो जाएगी।