ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर कांग्रेस में मतभेद: चिदंबरम ने उठाए सवाल, तो थरूर ने गिनाए लाभ
दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर कांग्रेस पार्टी के भीतर अलग-अलग राय सामने आई है। जहां पी. चिदंबरम ने सम्मेलन से जुड़े कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए हैं, वहीं शशि थरूर ने इसके संभावित फायदों पर जोर दिया है। इस बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत पहुंच चुके हैं और प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात हो चुकी है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी जल्द दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है।
VIMARSHNAARAD TVदिल्ली में ब्रिक्स देशों का 18वां शिखर सम्मेलन शुरू हो चुका है, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, इस आयोजन को लेकर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच विचारों में भिन्नता देखी गई है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के संदर्भ में कुछ तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने सम्मेलन के उद्देश्यों और इसके परिणामों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।
दूसरी ओर, कांग्रेस के ही एक अन्य वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने इस सम्मेलन के महत्व को रेखांकित किया है। थरूर ने ब्रिक्स के माध्यम से भारत को मिलने वाले संभावित आर्थिक और रणनीतिक लाभों की चर्चा की है।
इस कूटनीतिक हलचल के बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत की राजधानी दिल्ली पहुंच चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की है, जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई है।
शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी जल्द दिल्ली पहुंचने की संभावना है। उनके आगमन को लेकर सुरक्षा और कूटनीतिक स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
ब्रिक्स देशों का यह समूह वैश्विक राजनीति में अपनी बढ़ती भूमिका के लिए जाना जाता है। दिल्ली में हो रहे इस सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग और भविष्य की रणनीतियों पर गहन विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस नेताओं के इन विरोधाभासी बयानों की चर्चा जोरों पर है। जहां एक पक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरा पक्ष वैश्विक मंच पर भारत की भागीदारी को सकारात्मक रूप में देख रहा है।
आने वाले दिनों में शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाले समझौतों और चर्चाओं पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि ब्रिक्स के सदस्य देश किन प्रमुख वैश्विक चुनौतियों पर एक साझा सहमति बना पाते हैं।