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ब्रिक्स समूह में भारत की भूमिका: क्या देश को मिल रहा है फायदा? विशेषज्ञों के बीच मंथन

ब्रिक्स समूह में भारत की भागीदारी और उससे मिलने वाले लाभों को लेकर विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत का प्राथमिक उद्देश्य ब्रिक्स को किसी भी तरह के पश्चिम-विरोधी गठबंधन में बदलने से रोकना है। हालांकि, रूस, चीन और ईरान जैसे देशों की मौजूदगी के कारण भारत के लिए यह संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

ब्रिक्स समूह में भारत की स्थिति और उसकी रणनीतिक भूमिका पर लगातार मंथन चल रहा है। बीबीसी न्यूज़ हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञ इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या इस समूह से भारत को वास्तव में कोई ठोस लाभ मिल रहा है। चर्चा का मुख्य केंद्र यह है कि भारत इस मंच का उपयोग अपने हितों को साधने के लिए कैसे कर रहा है।

विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि भारत का मुख्य लक्ष्य ब्रिक्स को एक ऐसे समूह के रूप में विकसित होने से रोकना है जो पश्चिम-विरोधी एजेंडे पर काम करे। भारत हमेशा से एक संतुलित विदेश नीति का पक्षधर रहा है और वह ब्रिक्स को एक समावेशी मंच के रूप में देखना चाहता है।

हालांकि, इस राह में कई जटिलताएं हैं। समूह में रूस, चीन और ईरान जैसे देशों की सक्रिय भागीदारी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है। इन देशों के अपने भू-राजनीतिक हित हैं, जो अक्सर पश्चिमी देशों के साथ टकराव की स्थिति पैदा करते हैं। ऐसे में भारत के लिए ब्रिक्स के भीतर संतुलन बनाए रखना आसान नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को इस समूह में अपनी बात रखने के लिए काफी कूटनीतिक कौशल की आवश्यकता है। ब्रिक्स का विस्तार और उसमें शामिल नए सदस्य समूह की गतिशीलता को बदल रहे हैं। भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बरकरार रखते हुए समूह के भीतर अपनी आवाज बुलंद करे।

ब्रिक्स के भविष्य को लेकर भी अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ विश्लेषक इसे वैश्विक दक्षिण की आवाज मानते हैं, तो कुछ इसे चीन के बढ़ते प्रभाव का एक माध्यम देखते हैं। भारत की कोशिश है कि वह इस समूह को किसी एक देश के प्रभाव में जाने से रोके और इसे बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के अनुरूप बनाए रखे।

आने वाले समय में ब्रिक्स की बैठकें और उसमें लिए जाने वाले निर्णय भारत की कूटनीतिक सफलता को दर्शाएंगे। क्या भारत अपने उद्देश्यों में सफल हो पाएगा, यह एक बड़ा प्रश्न है जिस पर अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार नजर बनाए हुए हैं।

कुल मिलाकर, ब्रिक्स में भारत की भागीदारी एक जटिल लेकिन महत्वपूर्ण कूटनीतिक कवायद है। देश के नीति-निर्माता इस मंच का उपयोग वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें लगातार सतर्क रहना होगा।

स्रोत

मूल संदर्भ

01BBC News हिंदीमूल रिपोर्ट देखें ↗