भारतीय नौसेना के जहाज ने मिस्र में किया दौरा, समुद्री सहयोग को मिली नई मजबूती
भारतीय नौसेना के एक युद्धपोत ने अलेक्जेंड्रिया में चार दिवसीय यात्रा पूरी की है। इस दौरान मिस्र की नौसेना के साथ संयुक्त अभ्यास किया गया और युद्ध स्मारक पर शहीदों को नमन किया गया। इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री साझेदारी को गहरा करना और आपसी पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान करना था।

भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट, जो अपनी परिचालन तैनाती पर था, हाल ही में मिस्र के अलेक्जेंड्रिया पहुंचा। 14 से 17 सितंबर, 2026 तक चले इस प्रवास के दौरान, मिस्र की नौसेना ने अपने पोत 'अल कदीर' के जरिए भारतीय जहाज का स्वागत किया। यह यात्रा दोनों मित्र राष्ट्रों के बीच समुद्री संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक प्रयास थी।
यात्रा के दौरान, जहाज के कमांडिंग ऑफिसर और चालक दल ने चैटबी युद्ध स्मारक पर जाकर उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने दोनों विश्व युद्धों में अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस स्मारक में 12 सैनिकों की समाधियां मौजूद हैं, साथ ही यहां उन 19 भारतीय सैनिकों के नाम भी अंकित हैं जिन्होंने पूर्वी भूमध्य सागर में अपनी जान गंवाई थी।
मिस्र में भारत के राजदूत सुरेश के. रेड्डी ने जहाज का दौरा किया और चालक दल के साथ चर्चा की। उन्होंने इस क्षेत्र में भारतीय नौसेना की निरंतर उपस्थिति को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया। राजदूत की उपस्थिति ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और रक्षा संबंधों के महत्व को रेखांकित किया।
अभ्यास के हिस्से के रूप में, भारतीय जहाज ने मिस्र की नौसेना के पोत ईएनएस बर्नीस के साथ 'पैसेज एक्सरसाइज' (पैसेक्स) में हिस्सा लिया। इस संयुक्त युद्धाभ्यास में संचार कौशल, समन्वित समुद्री गतिविधियों और समुद्र में ईंधन भरने की प्रक्रियाओं का अभ्यास किया गया। यह साझा प्रशिक्षण दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के लिए पेशेवर विशेषज्ञता साझा करने का एक बेहतरीन मंच साबित हुआ।
इस प्रकार की समुद्री गतिविधियां न केवल दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी तालमेल को बेहतर बनाती हैं, बल्कि समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को भी सुदृढ़ करती हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा भारत और मिस्र की पुरानी मैत्री को और अधिक प्रगाढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
