भारत-ईएफटीए व्यापार समझौते का लाभ उठाने के लिए वाणिज्य सचिव ने निर्यातकों को किया प्रोत्साहित
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भारत-ईएफटीए टीईपीए समझौते के तहत निर्यातकों को नए अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने निवेश और व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया।
VIMARSHNAARAD TVवाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में निर्यातकों और उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित किया। यह कार्यक्रम द्वितीय भारत-ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन 2026 का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (टीईपीए) के लाभों को अधिकतम करना है।
अग्रवाल ने बताया कि यह समझौता भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को कवर करता है। उन्होंने कहा कि ईएफटीए के सदस्य देश - आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड - के साथ भारत ने अपने बाजार खोल दिए हैं।
वाणिज्य सचिव ने इस समझौते को केवल शुल्क में कमी तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा लाभ व्यापार में पूर्वानुमान है, जिससे कंपनियां आत्मविश्वास के साथ निवेश कर सकती हैं और आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित कर सकती हैं।
उन्होंने भारतीय कंपनियों से ईएफटीए देशों के व्यवसायों के साथ मिलकर मूल्य श्रृंखला बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ईएफटीए के उच्च आय वाले बाजारों में गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की भारी मांग है।
अग्रवाल ने निर्यातकों को सलाह दी कि वे अगले पांच वर्षों के लिए प्रत्येक भागीदार देश के लिए एक ठोस कार्य योजना तैयार करें। उन्होंने कृषि उत्पादों के निर्यात में मौजूद अवसरों को पहचानने पर भी जोर दिया।
समझौते की एक प्रमुख विशेषता निवेश प्रतिबद्धता है। इसके तहत ईएफटीए निवेशकों द्वारा भारत में 15 वर्षों के भीतर 100 अरब डॉलर का निवेश और 10 लाख रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।
वाणिज्य सचिव ने कहा कि भारत और ईएफटीए देशों के बीच गहरी कारोबारी साझेदारी निवेश को मौजूदा स्तर से काफी आगे ले जा सकती है। उन्होंने सभी हितधारकों से इस समझौते के अवसरों को देश के हर कोने तक पहुंचाने का आह्वान किया।