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भारत और अमेरिका के बीच रक्षा समझौता: 100 से अधिक जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइलों की खरीद पर मुहर

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अमेरिका से जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइलें खरीदने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस डील के तहत भारत 100 से अधिक मिसाइलें प्राप्त करेगा, जो दुश्मन के टैंकों को सटीक रूप से निशाना बनाने में सक्षम हैं। अमेरिकी राजदूत ने इस समझौते की पुष्टि की है, साथ ही भविष्य में इन मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।

भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका के साथ जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइलों की खरीद के लिए समझौता किया है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सौदे के तहत भारत को 100 से अधिक मिसाइलें मिलेंगी। ये मिसाइलें अपनी सटीकता और दुश्मन के टैंकों को खोजकर नष्ट करने की क्षमता के लिए जानी जाती हैं।

अमेरिकी राजदूत ने इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की जानकारी दी है। यह डील भारत की सैन्य तैयारियों को एक नई मजबूती प्रदान करेगी। जेवलिन मिसाइलें आधुनिक युद्धक्षेत्र में बेहद प्रभावी मानी जाती हैं, जिससे भारतीय सेना की मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू भविष्य की संभावनाएं भी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश आने वाले समय में इन मिसाइलों के संयुक्त उत्पादन पर भी विचार करेंगे। यह कदम भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास हो सकता है।

जेवलिन मिसाइल प्रणाली अपनी 'फायर एंड फॉरगेट' तकनीक के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे युद्ध के दौरान सैनिकों के लिए एक विश्वसनीय हथियार बनाती है। दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाने में इसकी दक्षता इसे दुनिया की बेहतरीन एंटी-टैंक प्रणालियों में से एक बनाती है।

इस रक्षा सौदे को भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान से न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी यह एक सकारात्मक संकेत है।

फिलहाल, इस डील के तहत 100 से अधिक मिसाइलों की आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। आने वाले समय में संयुक्त उत्पादन को लेकर होने वाली चर्चाएं इस साझेदारी को और अधिक गहरा बना सकती हैं। भारतीय रक्षा मंत्रालय और अमेरिकी अधिकारियों के बीच इस दिशा में समन्वय जारी है।

यह समझौता भारत की रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जेवलिन मिसाइलों का शामिल होना भारतीय सेना की रक्षात्मक और आक्रामक दोनों क्षमताओं को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

स्रोत

मूल संदर्भ

01नवभारत टाइम्स on MSNमूल रिपोर्ट देखें ↗