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भारत और चीन की प्रजनन दर में गिरावट पर अर्थशास्त्रियों की चेतावनी, सरकारी नीतियों पर मंथन

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने जनसंख्या नियंत्रण पर एक नया वर्किंग पेपर जारी किया है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और चीन दोनों देशों में प्रजनन दर में गिरावट देखी जा रही है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चीन इस स्थिति को सुधारने में कठिनाई का सामना कर रहा है, और अब जनसंख्या नियंत्रण को सरकारी नीति का मुख्य उद्देश्य नहीं माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने जनसंख्या से संबंधित एक नया वर्किंग पेपर पेश किया है, जो देश की बदलती जनसांख्यिकीय स्थिति पर प्रकाश डालता है। इस रिपोर्ट में भारत और चीन की प्रजनन दरों की तुलना की गई है, जो दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

नवभारत टाइम्स के अनुसार, इस पेपर में स्पष्ट किया गया है कि जनसंख्या नियंत्रण अब सरकारी नीति का प्राथमिक उद्देश्य नहीं रह गया है। यह बदलाव देश की बदलती प्राथमिकताओं और भविष्य की आर्थिक चुनौतियों को दर्शाता है।

चीन की स्थिति पर बात करते हुए अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि वहां प्रजनन दर में आई गिरावट को सुधारना अब बहुत मुश्किल हो गया है। चीन सरकार इस स्थिति को पलटने के लिए कई प्रयास कर रही है, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है।

भारत के संदर्भ में, यह वर्किंग पेपर भविष्य की नीतियों के लिए एक दिशा-निर्देश का काम कर सकता है। जनसंख्या में गिरावट और उसके आर्थिक प्रभाव को समझना नीति निर्माताओं के लिए अनिवार्य हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या का मुद्दा अब केवल नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्यबल की उपलब्धता और आर्थिक विकास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

चीन का उदाहरण दुनिया भर के देशों के लिए एक सबक है कि कैसे जनसांख्यिकीय बदलाव एक देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। भारत को अपनी नीतियों को इस तरह से तैयार करना होगा कि वह भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सके।

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि जनसंख्या प्रबंधन के लिए अब अधिक व्यापक और समावेशी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। सरकार अब उन कारकों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित कर सकें।

आने वाले समय में, भारत की जनसंख्या नीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। अर्थशास्त्रियों की यह चेतावनी सरकार को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01नवभारत टाइम्समूल रिपोर्ट देखें ↗