भारत और श्रीलंका समुद्री सुरक्षा के लिए साथ आए, राजनाथ सिंह ने साझा की सहयोग की रणनीति
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोलंबो यात्रा के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को गहरा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों और आतंकवाद जैसी साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करेंगे। हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक महत्ता को रेखांकित करते हुए उन्होंने भविष्य में दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी और आपसी तालमेल बढ़ाने की योजना पर चर्चा की।
VIMARSHNAARAD TVरक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में अपनी कोलंबो यात्रा के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा के लिए दोनों पड़ोसी देशों का एक साथ आना अत्यंत आवश्यक है। राजनाथ सिंह के अनुसार, समुद्री सीमाओं पर सक्रिय अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए दोनों राष्ट्रों को अपनी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाना होगा।
बैठक के दौरान रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि अवैध रूप से मछली पकड़ने की समस्या और आतंकवाद का खतरा दोनों देशों के लिए चिंता का विषय है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और श्रीलंका मिलकर एक समन्वित योजना पर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि साझा भविष्य के लिए समुद्री सुरक्षा में सहयोग करना न केवल दोनों देशों के हित में है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
राजनाथ सिंह ने हिंद महासागर की रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ रक्षा संबंधों को प्राथमिकता देता है। उन्होंने श्रीलंका के साथ रक्षा सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की, जिसमें समुद्री निगरानी और सूचनाओं का आदान-प्रदान शामिल है। यह सहयोग दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करेगा।
रक्षा मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में दोनों देश संयुक्त अभ्यास और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाएंगे। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तकनीकी और संसाधनों का साझा उपयोग दोनों देशों की क्षमता को बढ़ाएगा। यह पहल न केवल समुद्री डकैती और तस्करी जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करेगी, बल्कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने में भी सहायक होगी।
अंत में, राजनाथ सिंह ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि सुरक्षा के क्षेत्र में यह नई पहल भविष्य के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और श्रीलंका की यह साझेदारी हिंद महासागर में एक सुरक्षित और समृद्ध वातावरण सुनिश्चित करने में सफल होगी।