भारत और स्विट्जरलैंड के बीच ऐतिहासिक समझौता, 100 अरब डॉलर निवेश और 10 लाख नौकरियों का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन की वार्ता के बाद भारत और स्विट्जरलैंड ने एक महत्वपूर्ण माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करने और 10 लाख रोजगार के अवसर पैदा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

भारत और स्विट्जरलैंड ने हाल ही में एक बड़ी आर्थिक साझेदारी की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद कई महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की गई। इस दौरान दोनों देशों के बीच निवेश, रोजगार और उन्नत तकनीक के आदान-प्रदान पर विशेष जोर दिया गया।
इस यात्रा का मुख्य आकर्षण इंडिया-ईएफटीए (EFTA) समझौता रहा। इस समझौते के माध्यम से भारत में 100 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश आने की उम्मीद है। इस निवेश का प्राथमिक उद्देश्य देश में औद्योगिक विकास को गति देना और आर्थिक गतिविधियों को व्यापक बनाना है।
रोजगार सृजन के मोर्चे पर भी यह डील बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आधिकारिक लक्ष्यों के अनुसार, इस साझेदारी से भारत में 10 लाख लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलने की संभावना है। यह कदम देश के युवाओं के लिए करियर के नए अवसर खोलने में सहायक सिद्ध होगा।
इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने और दोनों देशों के बीच पेशेवर संबंधों को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय बताया है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी से न केवल आर्थिक लाभ होगा, बल्कि तकनीकी सहयोग और नवाचार के क्षेत्र में भी दोनों देश एक-दूसरे के पूरक बनेंगे।
इस मेगा डील के तहत छह बड़े फैसलों का ऐलान किया गया है, जो व्यापारिक सुगमता और निवेश के माहौल को बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने इन समझौतों को लागू करने के लिए एक रूपरेखा भी तैयार की है।
यह साझेदारी भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा है। स्विट्जरलैंड के साथ यह सहयोग आने वाले वर्षों में भारत के औद्योगिक और तकनीकी परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
