भारत का सुपरकंप्यूटिंग मिशन: स्वदेशी तकनीक से वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को मिल रही नई गति
राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत भारत ने 40 सुपर कंप्यूटर तैनात किए हैं, जो मौसम पूर्वानुमान, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी समाधान प्रदान कर रहे हैं।

भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा 1990 के दशक में परम 8000 के साथ शुरू हुई थी, जो अब राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (एनएसएम) के माध्यम से एक व्यापक राष्ट्रीय परितंत्र में बदल चुकी है। सितंबर 2026 तक, देश भर में 40 सुपर कंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिनकी कुल क्षमता 68 पेटाफ्लॉप्स है। यह मिशन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य सुपरकंप्यूटिंग में आत्मनिर्भरता हासिल करना है। इसके तहत स्वदेशी सर्वर, सॉफ्टवेयर, कूलिंग सिस्टम और नेटवर्किंग प्रौद्योगिकियां विकसित की गई हैं। सी-डैक और आईआईएससी बेंगलुरु इस मिशन को आगे बढ़ा रहे हैं, जो असेंबली, विनिर्माण और डिजाइन के तीन चरणों पर आधारित है।
उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) का उपयोग फसल पैदावार की भविष्यवाणी, दवा की खोज, नदी बाढ़ प्रबंधन और जंगल की आग के प्रसार को ट्रैक करने जैसे सामाजिक कार्यों में किया जा रहा है। ये प्रणालियां बड़े डेटासेट को संसाधित करने और जटिल वैज्ञानिक सिमुलेशन चलाने में सक्षम हैं।
एनएसएम के तहत 'रुद्र' सर्वर और 'परम रुद्र' सुपर कंप्यूटर का निर्माण एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा, छात्रों के लिए 'परम शावक' नामक सुपरकंप्यूटिंग-इन-द-बॉक्स विकसित किया गया है। मिशन ने अब तक 16,000 से अधिक शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित किया है और 1.5 करोड़ से अधिक कंप्यूट कार्यों को निष्पादित किया है।
आगामी 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में 'एस्टिक-2026' सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सीएसआईआर द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सुपरकंप्यूटिंग और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों पर चर्चा की जाएगी, जो 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण को समर्थन देगा।
सुपर कंप्यूटर समानांतर प्रसंस्करण का उपयोग करते हैं, जिससे वे पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में जटिल गणनाओं को बहुत तेजी से हल कर सकते हैं। इनकी शक्ति को फ्लॉप्स में मापा जाता है। भारत का यह बढ़ता डिजिटल परितंत्र न केवल आयातित प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षमता भी विकसित कर रहा है।
यह मिशन संयुक्त राष्ट्र के 11 सतत विकास लक्ष्यों में भी योगदान दे रहा है। शिक्षा, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर, एनएसएम भारत को वैज्ञानिक खोज और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में एक अग्रणी शक्ति बनाने की दिशा में अग्रसर है।
