भारत के एक हिस्से में 125 साल की सबसे कम बारिश, अल नीनो का असर बना चिंता का विषय
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, देश के एक विशिष्ट हिस्से में पिछले 125 वर्षों में सबसे कम बारिश दर्ज की गई है। इस स्थिति के पीछे भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में अल नीनो की मजबूत सक्रियता को मुख्य कारण माना जा रहा है, जिसने सितंबर के अधिकांश दिनों में वर्षा की गतिविधियों को प्रभावित किया है।
VIMARSHNAARAD TVभारतीय मौसम विभाग (IMD) ने हाल ही में बारिश को लेकर चिंताजनक आंकड़े साझा किए हैं। देश के एक हिस्से में पिछले 125 वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया है, जहां इस बार सबसे कम वर्षा दर्ज की गई है। यह स्थिति कृषि और जल संसाधनों के प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखी जा रही है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस असामान्य वर्षा पैटर्न के पीछे मुख्य कारण अल नीनो की मजबूत स्थिति है। भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में अल नीनो का प्रभाव काफी सक्रिय रहा है, जिसका सीधा असर भारत के मानसून पर पड़ा है।
सितंबर के अधिकांश दिनों में बारिश की गतिविधियां काफी कमजोर रहीं। अल नीनो के कारण उत्पन्न हुई यह स्थिति न केवल तापमान में वृद्धि का कारण बनती है, बल्कि वर्षा के वितरण को भी बुरी तरह प्रभावित करती है।
IMD के ये आंकड़े इसलिए भी परेशान करने वाले हैं क्योंकि यह लंबे समय के औसत से काफी नीचे हैं। 125 वर्षों का यह रिकॉर्ड दर्शाता है कि जलवायु संबंधी बदलाव किस तरह से स्थानीय मौसम को प्रभावित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो का प्रभाव केवल एक महीने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे मानसून सीजन की कार्यप्रणाली को बदल देता है। सितंबर में बारिश की कमी ने इस क्षेत्र में जल संकट की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।
स्थानीय प्रशासन और किसानों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है। कम बारिश के कारण फसलों की सिंचाई और जल भंडारण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
मौसम विभाग लगातार इन स्थितियों पर नजर बनाए हुए है। अल नीनो की सक्रियता और उसके कारण मानसून पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है ताकि भविष्य के लिए बेहतर रणनीति बनाई जा सके।
यह घटनाक्रम जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक चक्रों के बीच के जटिल संबंधों को उजागर करता है। आने वाले समय में मौसम के मिजाज को लेकर अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।